क्या सच में मोहम्मद शमी को शुरुआती 4 मैच में नहीं लेना रोहित शर्मा की चूक थी? पढ़िए हर सवाल का जवाब

Mohammed Shami: रोहित शर्मा अनुभवी और टैलेंटेड क्रिकेटर की कदर बेहतर तरह से जानते हैं। यही वजह है कि एशिया कप में जब रोहित शर्मा से आर अश्विन को लेकर सवाल पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि हम उनके संपर्क में हैं।

जब अक्षर पटेल चोटिल हुए तो उनकी जगह आर अश्विन को टीम में जगह दी गई। अहम बात यह है कि आर अश्विन 6 साल से वनडे टीम से बाहर हैं इसके बाद भी उन्हें रोहित ने टीम में जगह दी।

mohammed shami

टैलेंट की कद्र जानते हैं रोहित

इसी तरह अगर मोहम्मद शमी की बात करें तो 2021 में टी-20 विश्वकप के बाद शमी को कह दिया गया था कि आपकी सेवाओं की जरूरत नहीं है। लेकिन महज 10 महीनों के भीतर वह टीम इंडिया के मुख्य तेज गेंदबाज बनकर सामने आए, जब जसप्रीत बुमराह चोटिल होकर टीम से बाहर हुए।

कुछ इसी तरह उमेश यादव और अजिंक्या रहाणे का भी उदाहरण है। रहाणे को वर्ल्ट टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के लिए चुना गया था, बावजूद इसके कि वह एक साल से टीम से बाहर थे।

अनुभव पर भरोसा करते हैं कप्तान रोहित शर्मा
रोहित शर्मा हमेशा अनुभव को तरजीह देते हैं। जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में टी-20 में उमेश यादव को मौका दिया गया था तो रोहित से इसको लेकर सवाल पूछा गया था।

उन्होंने कहा था कि उमेश और शमी जैसे खिलाड़ियों को किसी भी फॉर्मेट में मैच प्रैक्टिस की जरूरत नहीं है। वो कई सालों से यह करते आ रहे हैं। वो कभी भी अच्छा प्रदर्श कर सकते हैं और आपको अच्छे नतीजे दे सकते हैं।

आखिर शमी क्यों नहीं खेले शुरुआती 4 मैच?
ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर रोहित कैसे विश्वकप के चार शुरुआती मैचों में मोहम्मद शमी को प्लेइंग इलेवन से बाहर रख सकते हैं। शामी विश्वकप की टीम में सबसे अनुभवी गेंदबाज हैं, वह पिछले 12 मैचो में 19 विकेट लेकर फॉर्म में भी थे। विश्वकप से दो हफ्ते पहले उन्होंने उन्होंने मैच में पांच विकेट भी लिया था। क्या रोहित इन बातों को नहीं जानते थे।

शमी ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किया
मोहम्मद शमी ने पिछले 6 मैचों में 23 विकेट लेकर कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। वह तीन बार 5 विकेट लेने का कारनाम पिछले 6 मैचों में कर चुके हैं।

न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में तो उन्होंने 7 विकेट अपने नाम किए, वनडे में ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय गेंदबाज बने हैं। इसके साथ ही विश्वकप में सबसे तेज 50 विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बन गए हैं। उन्होंने महज 17 मैंच में यह कारनामा अपने नाम किया है।

शमी को मौका नहीं मिलने की वजह
अब आते हैं उस सवाल पर क्या शमी को शुरुआत के 4 मैचों में प्लेइंग 11 में शामिल नहीं करना रोहित शर्मा का गलत फैसला था। दरअसल टीम इंडिया के टॉप 2 गेंदबाजों की बात करें तो जिस तरह की फॉर्म में जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज थे वो दोनों टॉप-2 की पसंद थे, एक कैलेंडर ईयर में सर्वाधिक विकेट लेने की वजह से उन्हें टीम से बाहर करने के बारे में नहीं सोचा जा सकता था।

यही वजह है कि रोहित के पास शामी को तीसरे तेज गेंदबाज के तौर पर खिलाने का रोहित के पास विकल्प नहीं था। इसकी बड़ी वजह है कि बुमराह, सिराज और शमी तीनों पर बल्ले से भरोसा नहीं किया जा सकता है।

स्थिति के अनुरूप शार्दुल को चुना गया
विश्वकप में यह तकरीबन साफ था कि कुलदीप यादव को टीम लीड स्पिनर के तौर पर खिलाएगी। कुलदीप बल्ले से कुछ खास नहीं कर पाते हैं लिहाजा रोहित के पास ऐसे वक्त शार्दुल ठाकुर ही बेहतर विकल्प थे।

हालांकि शार्दुल शमी से कमतर गेंदबाज हैं, लेकिन हार्दिक पांड्या के टीम में होने की वजह से उन्हें टीम में अतिरिक्त तेज गेंदबाज के तौर पर शामिल किया गया, जो बल्लेबाजी भी कर सकते है।

8वें नंबर पर बल्लेबाजी की क्या जरूरत
अब सवाल उठेगा कि आपको 8वे नंबर पर बल्लेबाजी क्यों चाहिए। इसे समझना है तो आपको विश्वकप के दूसरे सेमीफाइनल के नतीजे को देखना होगा। मैच में जब स्टीव स्मिथ का विकेट गिरा तो टीम को 39 रनों की दरकार थी।

अगर 8वें नंबर पर मिचेल स्टार्क अच्छी बल्लेबाजी नहीं कर पाते तो ऑस्ट्रेलिया का बोरिया-बिस्तर विश्वकप में सिमट गया होता। स्टार्क और कमिंस ने टीम को संभाला और तीन विकेट से मैच में जीत दर्ज की।

ऑस्ट्रेलिया जबरदस्त उदाहरण
पैट कमिंस नंबर 8 पर बतौर बल्लेबाज अहम भूमिका निभाते हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में भी उन्होंने ग्लेन मैक्सवेल के साथ जबरदस्त पारी खेली। अगर दूसरे छोर पर पैट कमिंस ने विकेट नहीं संभाला होता तो ऑस्ट्रेलिया यह मैच बहुत पहले हार जाती।

ग्लेन मैक्सवेल अपने शॉट नहीं खेल पाते। लिहाजा नंबर 8 पर ऐसे खिलाड़ी का होना जरूरी हो जाता है जो बल्ले से भी योगदान दे सके। ऐसे में शार्दुल ठाकुर ही वह एकमात्र विकल्प थे।

हार्दिक की चोट से बदली स्थिति
हार्दिक पांड्या के चोटिल होने के बाद स्थितियां काफी बदल गईं। भारत के पास अतिरिक्त तेज गेंदबाज का विकल्प नहीं बचा था, लिहाजा रोहित शर्मा के सामने बड़ी चुनौती थी और रोहित ने तुरंत शमी को टीम में जगह दी क्योंकि वह बेहतर गेंदबाज थे।

वह अब तीसरे तेज गेंदबाज के तौर पर जोखिम नहीं ले सकते थे। उन्हें शमी जैसे गेंदबाज की जरूरत थी जिसपर वह भरोसा कर सके कि वह अपने पूरे 10 ओवर कर सकता है और विकेट भी ले सकता है।

टीम को आपके सपोर्ट की जरूरत
एक के बाद एक मैच में शामी ने लगातार विकेट लेकर इस भरोसे को कायम भी रखा। अब जब भारत विश्वकप के फाइनल में है, भारतीय फैंस उम्मीद करेंगे कि शमी एक बार फिर से जबरदस्त खेल दिखाएं और टीम इंडिया विश्व विजेता बने।

फैंस को रोहित शर्मा और टीम मैनेजमेंट को शमी को शुरुआती 4 मैचों में टीम से बाहर रखने के लिए दोषी करार देने की बजाए टीम का समर्थन करना चाहिए।

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