ICC ने तोड़ा इस भारतीय खिलाड़ी का दिल, 308 रनों के बावजूद नहीं दिया वर्ल्ड कप मेडल, आखिर क्या है कारण?
Pratika Rawal: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने आईसीसी महिला विश्व कप 2025 जीतकर इतिहास रचा, लेकिन इस जीत के जश्न में एक खिलाड़ी की कहानी ने सभी को भावुक कर दिया। वह हैं स्टार सलामी बल्लेबाज प्रतिका रावल। जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 308 रन बनाकर टीम को फाइनल तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, उन्हें जीत के बाद विजेता मेडल नहीं मिला।
आखिर एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को उनके ऐतिहासिक योगदान के बावजूद मेडल से क्यों वंचित रखा गया? इसकी वजह है अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) का सख्त नियम, जिस पर अब चर्चा भी हो रही है।

मेडल न मिलने के पीछे का मुख्य कारण
प्रतिका ने टूर्नामेंट की शुरुआत में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया और छह पारियों में 308 रन बनाए। लीग चरण के आखिरी मैच में बांग्लादेश के खिलाफ फील्डिंग के दौरान उनके टखने में गंभीर चोट लग गई। चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें सेमीफाइनल और फाइनल सहित बाकी टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।
ICC का नियम और रिप्लेसमेंट
आईसीसी के दिशानिर्देशों के अनुसार, विजेता टीम का मेडल केवल 15 सदस्यीय आधिकारिक टीम (स्क्वाड) के सदस्यों को ही दिया जाता है, जो फाइनल के समय टीम का हिस्सा होते हैं। प्रतिका चोट के कारण बाहर हो गईं, इसलिए उनकी जगह शेफाली वर्मा को आधिकारिक तौर पर टीम में शामिल किया गया और अंतिम 15 में उनका नाम शामिल हो गया। फाइनल में प्रतिका अंतिम 15 में नहीं थी लेकिन उनको मेडल नहीं मिला। यह नियम उन खिलाड़ियों पर लागू होता है जिन्हें चोट के कारण बीच टूर्नामेंट में टीम से बदल दिया जाता है।
प्रतिका थीं फाइनल के दौरान मौजूद
प्रतिका फाइनल के दौरान व्हीलचेयर पर बैठकर मैदान पर मौजूद थीं और जीत का जश्न मनाया। मैच के बाद कुछ साथी प्लेयर्स ने प्रतिका के गले में मेडल डालकर सम्मान प्रकट किया। कप्तान हरमनप्रीत कौर और कोच अमोल मजूमदार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि यह जीत हर उस खिलाड़ी की है जिसने टीम को आगे बढ़ाया, और प्रतिका उनमें सबसे अहम हैं।
कैसी थी प्रतिका रावल की प्रतिक्रिया
प्रतिका रावल ने भावुक होकर कहा, "मेरे लिए बाहर बैठकर मैच देखना मुश्किल था। मेरे लिए इससे आसान काम मैच खेलना था। मेरे कंधे पर यह झंडा मेरे लिए बहुत मायने रखता है।"
ICC के नियम पर उठे सवाल
प्रतिका रावल की कहानी ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि क्या आईसीसी को अपने मेडल वितरण नियमों में बदलाव करना चाहिए। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे खिलाड़ियों के लिए अतिरिक्त मेडल का प्रावधान होना चाहिए, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो, भले ही वे फाइनल में न खेल पाए हों।












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