सायमंड्स के निधन के बाद लियोन ने उनको 'रॉय' कहा, लोग बहुत समय से उनको रॉय क्यों कहते थे?
नई दिल्ली, 15 मई: एंड्रयू सायमंड्स के निधन पर नाथन लियोन ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर की। लियोन शोकाकुल थे, इसलिए जब उन्होंने पोस्ट में सायमंड्स की जगह रॉय लिख दिया तो एकबारगी लगा कि दुख में भूलवश ऐसा कर गए हों, लेकिन ऐसा नहीं था क्योंकि कार दुर्घटना के कारण दुनिया को छोड़कर चले गए एंड्रयू सायमंड्स को वाकई में लोग रॉय कहते थे।
सबसे तेजतर्रार क्रिकेटरों में से एक, एंड्रयू साइमंड्स का 46 वर्ष की आयु में 14 मई की रात टाउन्सविले से लगभग 50 किलोमीटर दूर एक कार दुर्घटना में निधन हो गया।

एंड्रयू सायमंड्स को रॉय क्यों कहा जाता था
खबर सुनकर पूरी क्रिकेट बिरादरी सदमे में थी। हम साइमंड्स को मध्य क्रम के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक के तौर पर जानते हैं। उन्होंने अपने समय में ऑस्ट्रेलियाई टीम में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे ऐसे बल्लेबाज थे जो किसी भी समय गेंदबाज को धुनकर रख सकते थे। ऊपर से तकनीक भी शानदार थी। दुनिया में ऐसे क्रिकेट बहुत ही कम होते हैं। केविन पीटरसन का भी ऐसे खिलाड़ी के तौर पर नाम लिया जा सकता है।
लेकिन यह बात अब भी बहुत कम लोगों को समझ आती है कि एंड्रयू सायमंड्स को रॉय क्यों कहा जाता था।
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बचपन के कोच ने उन्हें इस नाम से सबसे पहले बुलाया
साइमंड्स को लोकप्रिय रूप से "रॉय" उपनाम से जाना जाता था और उनके बचपन के कोच ने उन्हें इस नाम से सबसे पहले बुलाया था। इस नाम के पीछे का कारण पूर्व बास्केटबॉल खिलाड़ी लेरॉय लोगगिन्स से जुड़ा है जिनको सायमंड्स काफी पसंद करते थे। उनके फैन थे। लोगिन्स 1981 से प्रसिद्ध नेशनल बास्केटबॉल लीग का हिस्सा थे और 2001 तक खेलते रहे। लेरॉय के नाम से जुड़ा रॉय बाद में सायमंड्स को मिल गया और उनके दोस्त व करीबी लोग उनको यही कहकर पुकारने लगे।

नाथन लियोन ने सायमंड्स को इसी वजह से रॉय कहा
इसी वजह से नाथन लियोन ने सायमंड्स के निधन के बाद उनको रॉय कहा।
साइमंड्स ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 26 टेस्ट में 40.61 की औसत से 1462 रन बनाए, जबकि उन्होंने 198 वनडे में 39.75 की औसत से 5088 रन बनाए। ऑलराउंडर सिर्फ 14 टी 20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने में सफल रहे, लेकिन 48.14 की औसत से 337 रन बनाकर बड़ा प्रभाव छोड़ा। वो महानतम फिल्डर में एक थे और बुलेट थ्रो के साथ सटीक निशाना मारते थे।

एक ऐसा खिलाड़ी जिसका प्रभाव ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट पर बहुत पड़ा
साइमंड्स ने 1998 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। तब एकदिवसीय प्रारूप में सायमंड्स के होने का ऑस्ट्रेलियाई टीम पर काफी प्रभाव पड़ा। वह मैदान पर अपना शत-प्रतिशत देने से कभी पीछे नहीं हटे। वह ऑस्ट्रेलिया के लिए दो विश्व कप विजेता अभियानों का भी हिस्सा थे। लेकिन उन्हें मैदान के बाहर बहुत सारे विवादों का सामना करना पड़ा, जिसने उनके क्रिकेट करियर को प्रभावित किया।
इंडियन प्रीमियर लीग में उन्होंने डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने काउंटी क्रिकेट में केंट, लंकाशायर, सरे और ग्लूस्टरशायर का भी प्रतिनिधित्व किया।












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