धांसू रिकॉर्ड के बावजूद मनोज तिवारी को नहीं मिले ज्यादा मौके? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह
Manoj Tiwary announces retirement: भारत के दिग्गज क्रिकेटर मनोज तिवारी ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को छोड़ने की घोषणा कर दी है। भारतीय टीम के अलावा मनोज तिवारी घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में भी दमदार प्रदर्शन कर चुके हैं। मनोज तिवारी ने घरेलू क्रिकेट में कई बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम किए हैं।
खेल चुके हैं भारत के लिए वनडे और टी-20: मनोज तिवारी ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 15 वनडे मैच खेले हैं। उन्होंने साल 2008 में डेब्यू किया और अपना आखिरी वनडे साल 2015 में खेला। टी20 फॉर्मेट में मनोज तिवारी को साल 2011 और 2012 में केवल तीन मैच खेलने का मौका मिला। घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने के बावजूद मनोज तिवारी भारत के लिए अधिक इंटरनेशनल मैचों में हिस्सा नहीं ले सकें।

टेस्ट में नहीं मिला खेलने का मौका: भारत ने वनडे और टी-20 में मनोज तिवारी को भले ही खेलने का मौका दिया। लेकिन वह अपने करियर में एक भी टेस्ट मैच नहीं खेल सके। वह साल 2007 में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले थे। लेकिन चोट के कारण वह टीम से बाहर हो गए और इसके बाद उन्हें फिर कभी दोबारा मौका नहीं दिया गया।
करीब दस हजार रन बनाने के बाद भी अनदेखी: मनोज तिवारी ने अपने फर्स्ट क्लास करियर में 225 पारियों में 9,908 रन बनाए। इस दौरान उनका औसत 48.56 का रहा। इसके बावजूद भी वह टेस्ट के लिए कभी नहीं बुलाए गए। तिवारी ने फर्स्ट क्लास करियर में 29 शतक और 45 अर्धशतक बनाए। इस दौरान उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 303 रन था।
इस वजह से नहीं मिला मौका: मनोज तिवारी के करियर में चोट ने उनकी दिशा बदल दी। कभी चोट के कारण वह मिलने वाले मौकों को भी नहीं भुना सके। इसके बाद साल 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप के बाद भारतीय टीम में रोहित शर्मा जैसे कुछ युवा खिलाड़ियों की एंट्री हुई। जिससे मनोज तिवारी के लिए टीम में आना और भी मुश्किल हो गया था।












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