IPL 2022 में खराब अंपायरिंग पर डैनियल विटोरी ने तोड़ी चुप्पी, बताया कैसे उबर सकते हैं खिलाड़ी
नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के 15वें सीजन का खेल जारी है, जिसका फैन्स जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। इस सीजन में अब तक 41 मैच खेले जा चुके हैं जिसमें फैन्स को कई आखिरी ओवर के थ्रिलिंग मैच देखने को मिले तो कुछ ऐसे मैच भी रहे जिसमें आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर टीमों ने जीत हासिल की। हालांकि इस दौरान अंपायरिंग के दर्जे को लेकर लगातार सवाल खड़े होते नजर आये हैं, जिसके चलते मैदान के अंदर और बाहर विवाद भी देखने को मिला है।

इस फेहरिस्त में सबसे ताजा मामला दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेला गया मैच रहा जिसमें दिल्ली की टीम का खेमा अंपायरिंग के फैसलों से खासा नाराज नजर आया और मैच के दौरान अंपायर के एक फैसले से नाराज कप्तान ऋषभ पंत ने अपनी टीम को मैदान छोड़कर वापस आने का इशारा भी कर दिया।
मैच खत्म होने की कगार पर था और दिल्ली कैपिटल्स की टीम का इस मैच में जीत हासिल करना मुश्किल नजर आ रहा था, लेकिन खराब अंपायरिंग ने जले पर नमक छिड़कने का काम किया और आखिरी पलों में काफी खराब दृश्य देखने को मिले। उल्लेखनीय है कि मैदान पर दिल्ली कैपिटल्स के रॉवमैन पॉवेल और कुलदीप यादव बल्लेबाजी कर रहे थे और तभी एक हाई फुलटॉस गेंद फेंकी गई जिसे कप्तान पंत और दिल्ली कैपिटल्स के सपोर्ट स्टाफ ने नो बॉल चेक करने की अपील की, हालांकि अंपायर उनसे सहमत नजर नहीं आये।
वहीं फील्डिंग कोच प्रवीण आमरे भी मैदान पर भागते आये और अंपायरिंग के फैसले को समझने की कोशिश लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो दिल्ली ने खिलाड़ियों को वापस बुलाने का काम किया। इस घटना के बाद खराब अंपायरिंग को लेकर एक बार फिर से विवाद शुरू हो गया है और अब इस मुद्दे पर न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान डैनियल विटोरी ने एक सलाह दी है कि कैसे मैच के दौरान खराब अंपायरिंग के फैसलों से बचा जा सकता है।
ईएसपीएन क्रिकइंफो से बात करते हुए विटोरी ने कहा,'इसको लेकर मेरा एक ही सुझाव है कि वाइड और नो बॉल से जुड़े सभी डिसिजन पर खिलाड़ियों के पास रिव्यू लेने का अधिकार होना चाहिये। मुझे लगता है कि हम यह लगातार अंपायर्स की तरफ से गलती को होते हुए बार-बार देख रहे हैं जो कि गलत है। यह काफी विवादास्पद है और मुझे लगता है कि खिलाड़ियों के पास इसको लेकर ज्यादा बेहतर दृष्टिकोण उपलब्ध है।'
विटोरी ने आगे बात करते हुए कहा कि हम ज्यादातर देखते हैं कि पारी के अंत में ज्यादातर वाइड गेंद देखने को मिलती है। आप आकाशदीप का उदाहरण ले लीजिये जहां पर बायें हाथ का यह गेंदबाज अन्य गेंदबाजों के मुकाबले इस एंगल पर बल्लेबाजों को ज्यादा छकाता है लेकिन अंपायर इन गेंदों पर बल्लेबाज के बजाय विकेटकीपर को प्वाइंट मानकर उन्हें वाइड करार देता है। मुझे लगता है कि मैच के निर्णय में यह भी काफी जरूरी फैसले से हैं जिसे अंपायर्स लगातार समझ पाने में नाकाम हो रहे हैं।












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