टीम इंडिया के सितारे ऐसे बुझे जैसे सोचा नहीं था, भारत की चुभने वाली हार के 5 बड़े कारण
बर्मिंघम, 5 जुलाई: इंग्लैंड की टीम ने भारत को मसलकर रखते हुए पांचवां टेस्ट मैच बेहद बहादुरी से जीतकर 5 मैचों की टेस्ट सीरीज को 2-2 से ड्रा कर दिया। भारत की किस्मत अच्छी थी कि वह पिछले साल शुरू हुई इस सीरीज में पहले ही 2-1 से आगे चल रहा था वर्ना अगर इस साल नई सीरीज खेलनी होती तो टीम इंडिया अंग्रेजों से कई विभागों में पीछे दिखाई दे रही है।

भारत की चुभने वाली हार के बड़े कारण
एजबेस्टन में हुआ मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को पहले बैटिंग करने के लिए कहा जिसके जवाब में टीम इंडिया ने 416 बनाए और अंग्रेजों को केवल 284 रनों पर ढेर कर दिया। लेकिन इसके बाद इंग्लैंड मैच में वापसी करता नजर आया क्योंकि उन्होंने भारत को दूसरी पारी में 245 रनों पर समेटने के बाद जीत के लिए मिले 378 रनों के विशाल लक्ष्य को केवल 3 विकेट खोकर हासिल कर लिया।

1. टॉप ऑर्डर दोनों पारियों में फेल
अगर हम इस मैच में भारत के हार के कारणों की पड़ताल करेंगे तो भारत के टॉप आर्डर को विफल पाएंगे। भारतीय टीम ने पहली पारी में अपने शुरू के चार बल्लेबाजों का स्कोर 20 रन से ऊपर नहीं देखा। शुबमन गिल दोनों पारियों में विफल रहे, चेतेश्वर पुजारा पहली पारी में फ्लॉप होने के बाद दूसरी पारी में अर्धशतक लगाने में कामयाब रहे तो हनुमा विहारी और विराट कोहली फिर दोनों पारियों में सुपर फ्लॉप साबित हुए, जिसके चलते भारतीय टीम अपने निचले क्रम के बल्लेबाजों पर अधिक निर्भर हुई और जैसा कि क्रिकेट में होता है, आपका टॉप ऑर्डर लगातार फेल हो तो निचला क्रम निरंतर रन नहीं बना पाएगा।

टीम दूसरी पारी में 300 का स्कोर खड़ा कर सकती थी
भारत को इसका खामियाजा दूसरी पारी में देखने को मिला जब निचले क्रम पर ऋषभ पंत का साथ श्रेयस अय्यर, रवींद्र जडेजा और शार्दुल ठाकुर ठीक से नहीं दे सके। अगर टॉप ऑर्डर कुछ योगदान करने में सफल होता तो भारतीय टीम कम से कम दूसरी पारी में 300 का स्कोर खड़ा कर सकती थी और अंग्रेजों पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बना सकती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

2. गेंदबाजी में निराशा
भारतीय तेज गेंदबाजों ने पहली पारी में अच्छा प्रदर्शन किया जहां जसप्रीत बुमराह ने तीन, शमी ने दो और मोहम्मद सिराज ने 4 विकेट चटकाने में कामयाबी हासिल की लेकिन कोई भी गेंदबाज इंग्लैंड की पारी को 150 के आसपास खत्म करने के लिए पैना नहीं दिखाई दिया।

बेन स्टोक्स और जॉनी बेयरस्टो को हावी होने का मौका दिया
दरअसल इंग्लैंड की पहली पारी शुरू से दबाव में थी और उन्होंने अपनी आधी टीम केवल 83 रनों के स्कोर पर गंवा दी थी, लेकिन इसके बाद भारत ने बेन स्टोक्स और जॉनी बेयरस्टो को हावी होने का मौका दिया। इस काउंटर अटैक का टीम इंडिया के पास कोई जवाब नहीं था। इसी वजह से जिस इंग्लैंड को डेढ़ सौ या पौने दो सौ के आसपास आउट हो जाना चाहिए था वह 284 रन बनाकर आउट हुआ। यानी बात के पांच बल्लेबाजों ने 201 रन बनाए जो भारत के स्तर की गेंदबाजी के लिए कतई अच्छी बात नहीं है।
कुछ यही स्थिति दूसरी पारी में भी देखने को मिली जब इंग्लैंड के सभी बल्लेबाजों ने क्लिक किया और भारत को बैकफुट पर ला दिया।

3. कैच छोड़ो, मैच छोड़ो
भारत ने इस टेस्ट मैच में कई कैच छोड़े जिसमें पहली पारी में बेन स्टोक्स के दो कैच भी शामिल थे। बेन स्टोक्स ने अपने आप को आउट करने का पूरा मौका दिया लेकिन भारतीय टीम में शार्दुल ठाकुर और जसप्रीत बुमराह दोनों ने ही आसान कैच ड्रॉप किए। हालांकि बाद में बुमराह ने उतना ही शानदार कैच लेकर भरपाई करने की कोशिश की लेकिन इंग्लैंड के पास मोमेंटम आ चुका था।
इससे पहले शमी की गेंद पर जैक लीच का कैच विराट कोहली भी ड्रॉप कर चुके थे।

एक नहीं, कई मौके मिले थे कैच करने के
भारत के लिए सबसे घातक कैच छूटना जॉनी बेयरस्टो का साबित हुआ जिन्होंने दोनों ही पारियों में शतक लगाया है और खासकर दूसरी पारी में तो उन्होंने मैच विजेता इनिंग खेली है। सिराज ने बेयरस्टो को जो गेंद फेंकी वो स्लिप में हनुमा विहारी की ओर गई लेकिन इस खिलाड़ी ने ना केवल कैच छोड़ा बल्कि वह गेंद चौके के लिए चली गई।
ऐसे ही इंग्लैंड की पारी के 48 ओवर में जॉनी बेयरस्टो का एक और कैच छूटा, जब गेंद उनके बल्ले से गेंद बाहरी किनारा लेकर पंत के पास गई लेकिन यह विकेटकीपर मौका लपकने में कामयाब नहीं हुआ।

4. जसप्रीत बुमराह की कप्तानी
भारत नए कप्तान जसप्रीत बुमराह के साथ खेल रहा था जहां उन्होंने कुछ मौकों पर प्रभावित किया तो वही एक नए कप्तान के तौर पर उनका प्रदर्शन काफी निराशाजनक भी रहा। रवि शास्त्री और केविन पीटरसन जैसे दिग्गजों ने बुमराह की रक्षात्मक और डरपोक कप्तानी की कड़ी आलोचना भी की है। भारतीय टीम को जब दूसरी पारी में 300 के पार का स्कोर कम से कम खड़ा करना चाहिए था तब वे अपने खोल में चले गए और एक के बाद एक विकेट खोते गये।

फील्डिंग प्लेसमेंट भी बहुत अच्छी नहीं थी
दूसरी पारी में बुमराह की फील्डिंग प्लेसमेंट भी बहुत अच्छी नहीं थी। जब आप की गेंद 90 मील प्रति घंटा की रफ्तार से रिवर्स हो रही हो तब फील्ड प्लेसमेंट और भी अहम हो जाती है लेकिन बुमराह ने अच्छे सिंगल निकालने के लिए इंग्लैंड के बल्लेबाजों को पूरा मौका दिया।

5. बेन स्टोक्स और ब्रैंडन मैकुलम का जलवा
इस जोड़ी ने यह बात साफ कर दी थी कि वे आक्रामक क्रिकेट खेलेंगे और उन्होंने हाल ही में संपन्न हुई घरेलू सीरीज में कीवियो को भी 3-0 से धोया था। ऐसे में जब भारतीय टीम का अपेक्षाकृत अच्छा पेस अटैक उनके सामने आया तो उनसे कुछ डिफेंसिव अप्रोच की उम्मीद थी लेकिन स्टॉक और बेयरस्टो काउंटर अटैक करने में माहिर साबित हुए और दूसरी पारी में जो रूट ने उनका बखूबी साथ निभाया।

ये है नई और आक्रामक इंग्लैंड
खासकर यह दूसरी पारी थी जब स्टॉक्स और ब्रैंडन मैकुलम की सोच इंग्लैंड के बल्लेबाजों के ऊपर हावी दिखाई थी। इसी वजह से एलेक्स ली और जैक क्रॉली ने ओपनिंग में काफी तेज पारियां खेली। इंग्लैंड का नया दृष्टिकोण टेस्ट क्रिकेट को कहीं अधिक मनोरंजक बनाने में है और वो इसमें एक बार फिर से कामयाब हुआ।












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