IND vs AUS: उस रात करोड़ों फैन्स रो पड़े थे, नहीं खाया था खाना, जानें क्या है उस फाइनल की कहानी

India vs Australia Final: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रविवार को अहमदाबाद में वर्ल्ड कप का फाइनल मैच खेला जाएगा। टीम इंडिया दूसरी बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल मुकाबला खेल रही है। 20 साल पहले साल 2003 में भी दोनों टीमों के बीच फाइनल मैच खेला गया था। इसमें कंगारुओं ने बाजी मारी थी।

दक्षिण अफ्रीका में हुए उस वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा था। लीग चरण में भी ऑस्ट्रेलिया ने भारत को मात दी थी और जोहान्सबर्ग में खेले गए फाइनल में फिर से दोनों के बीच मुकाबला हुआ और इस बार भी ऑस्ट्रेलिया ने ही बाजी मारी। उस मैच के अहम पलों का जिक्र यहाँ किया गया है।

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भारत ने जीता था टॉस

भारतीय टीम के कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया था। शुरुआती समय में ऑस्ट्रेलिया के विकेट लेने दबाव बनाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया लेकिन यह फैसला गलत साबित हो गया। मैथ्यू हेडन और गिलक्रिस्ट ने पहले विकेट के लिए 105 रन ठोक डाले।

रिकी पोंटिंग ने जड़ा तेज शतक

इस मैच में ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे अहम खिलाड़ी कप्तान रिकी पोंटिंग साबित हुए। पोंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया के दो विकेट गिरने के बाद डेमियन मार्टिन के साथ मिलकर 234 रनों की अविजित भागीदारी की। पोंटिंग ने 121 गेंद में नाबाद 140 रन जड़े। मार्टिन ने नाबाद 88 रन बनाए और कुल स्कोर 2 विकेट पर 359 रन था। उस समय पावरप्ले रेस्ट्रिक्शन और एक गेंद के अलावा बिना डीआरएस खेलते हुए यह स्कोर पहाड़ जैसा था और फाइनल का दबाव अलग से थे। भारत के लिए हरभजन को 2 विकेट मिले। अन्य गेंदबाज सिर्फ पिटाई खाते रहे।

जवाब में खेलते हुए सचिन सस्ते में आउट

तेंदुलकर ने उस वर्ल्ड कप में 673 रन बनाए थे। उनके बल्ले से रन आने की उम्मीद थी। वह एक चौका जड़ने के बाद पहले ही ओवर की पांचवीं गेंद पर मैक्ग्रा की छोटी गेंद को पुल करते हुए ऊपर मार बैठे और गेंदबाज ने गेंद के नीचे जाकर कैच कर लिया। इस घटना ने करोड़ों भारतीयों का दिल तोड़ दिया। कई लोगों ने टीवी भी बंद कर दिए क्योंकि सचिन के आउट होने का मतलब उस समय टीम की हार से था।

सहवाग ने जगाई उम्मीद

सचिन के आउट होने के बाद सहवाग के बल्ले से रन आने लगे। अन्य बल्लेबाज कुछ खास नहीं कर पाए। गांगुली ने 24 और द्रविड़ ने 47 रन जड़े। एक बार बारिश से खेल रुका भी था। सहवाग फिफ्टी जड़ने के बाद आक्रामक लग रहे थे और तूफानी बैटिंग कर रहे थे। इस बीच मिडऑफ़ पर डैरेन लेहमन के हाथों में रन लेने का प्रयास करने पर वह रन आउट हो गए। लेहमन ने नॉन स्ट्राइक छोर पर सीधा थ्रो करके सहवाग को वापस भेज दिया। वह 81 गेंदों में 82 रन बनाकर आउट हुए। भारतीय पारी 234 पर सिमट गई और फैन्स सदमें में चले गए। मैक्ग्रा ने 3 विकेट झटके और पोंटिंग प्लेयर ऑफ़ द मैच रहे। सचिन 673 रनों के कारण प्लेयर ऑफ़ द सीरीज रहे।

करोड़ों फैन्स को गहरा धक्का लगा था

उस फाइनल मैच को भारत में टीवी पर देख रहे फैन्स आज भी याद करते हैं। एक-एक पल की घटना अब भी याद आती है। यह आलेख लिखते हुए वो पल मेरी आँखों के सामने आ रहे हैं, उन प्रशंसकों में एक मैं भी था। उस रात मैंने खाना नहीं खाया था। एक सप्ताह तक भरोसा ही नहीं हुआ था कि भारत फाइनल में हार गया। उस समय फैन्स रो पड़े थे। मोबाइल और इंटरनेट उस समय नहीं थे लेकिन ग्रामीण फैन्स को उस वर्ल्ड कप की सभी घटनाएं अब भी याद हैं। अब एक बार फिर से मौका आया है और टीम इंडिया ट्रॉफी उठाकर दर्शकों के उन जख्मों को ठीक कर सकती है।

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