मिलर ने गुजराती ढोकला क्या खाया,गेंदबाजों को ढोल की तरह बजा दिया
नई दिल्ली, 29 मई: डेविड मिलर ने गुजराती ढोकला क्या खाया, गेंदबाजों को ढोल की तरह बजा दिया। दक्षिण अफ्रीका के मिलर अभी गुजराती रंग में सराबोर हैं। गुजरात दिवस क मौके पर 1 मई को जश्न का माहौल था। गुजरात टाइंटस के होटल में भव्य समारोह का आयोजन किया गया था। हार्दिक पांड्या, आशीष नेहरा, शुभमन गिल समेत पूरी टीम ने डांडिया खेला। भारतीय परिधान में मिलर भी गजब ढा रहे थे। कभी पीले कुर्ते में तो कभी नीले कुर्ते में व पक्के गुजराती लग रहे थे।

मिलर की गुजरात में किस्मत ही बदल गयी
जश्न के बाद जब भोज का आयोजन हुआ तो ढोकला के साथ अन्य गुजराती व्यंजन भी परोसे गये। मिलर गुजरात क्या आये उनकी किस्मत ही बदल गयी। उन्होंने अपने आइपीएल करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। वे पिछले 10 साल से आइपीएल खेल रहे हैं लेकिन उनके बल्ले की ऐसी गर्जना पहले किसी ने नहीं सुनी। इस साल फाइनल के पहले तक उन्होंने 449 रन बनाये हैं। वे गुजरात के नये फिनिशर बन कर उभरे हैं। उनकी छोटी पारियां भी गुजरात की जीत में निर्णायक रहीं। इस आइपीएल में मिलर ने पहली बार अपने नाम के अनुरूप खेल दिखाया। 17 अप्रैल को किलर के रूप में चमके थे मिलर 17 अप्रैल को गुजरात की चेन्नई से भिड़ंत हुई थी। चेन्नई ने पहले खेलते हुए 169 रन बनाये थे। गुजरात की जवाबी पारी लड़खड़ा रही थी और मैच बिल्कुल खुला हुआ था। कोई टीम जीत सकती थी। गुजरात के 87 रन पर पांच विकेट गिर चुके थे और बारहवां ओवर चल रहा था। हार्दिक और तेवतिया जैसे विस्फोटक बल्लेबाज आउट हो चुके थे। तेवतिया की जगह राशिद खान मैदान पर उतरे।
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इस सीजन की चौकों-छक्कों की बरसात
13वां ओवर शुरू हुआ तो मिलर 52 रन पर खेल रहे थे। राशिद खान का खाता खुलना बाकी था। मिलर के ये 52 रन 29 गेदों पर बने थे। 13 वें ओवर में मिलर ने दो चौके लगाये और कुल 12 रन बने। 15 वें ओवर में मिलर ने एक छक्का लगाया और कुल 9 रन बने। 15 ओवर की समाप्ति के बाद गुजरात का स्कोर था 5 विकेट के नुकसान पर 108 रन। यानी उसे अब 30 गेंदों में 60 रन बनाने थे। 12 रन प्रति ओवर की जरूरत थी। ऐसे में गुजरात की जीत तभी संभव थी जब ताबड़तोड़ बल्लेबाजी हो। 16वें ओवर में मिलर ने एक छक्का लगाया और कुल 10 रन बने। अब 24 गेदों पर 52 रन चाहिए थे। लेकिन 17वें ओवर में चेन्नई के गेंदबाज ड्योन ब्रावो ने कमाल कर दिया। उन्होंने सिर्फ चार दिये। अब लक्ष्य और कठिन हो गया। तीन ओवर में 48 रन बनाने थे। यानी 16 रन प्रति ओवर। 18वें और 19वें ओवर का रोमांच 17 ओवर की समाप्ति के बाद मैच चेन्नई की तरफ झुका हुआ था। 18 गेंदों में 48 रन बनाना एक मुश्किल लक्ष्य था। गेंदबाजी के लिए क्रिस जॉर्डन आये। राशिद खान का बल्ला अभी तक खामोश था। लेकिन जॉर्डन के आते ही राशिद ने हल्ला बोल दिया। उन्होंने पहली गेंद पर छक्का, दूसरी गेंद पर भी छक्का, तीसरी गेंद पर चौका, चौथी गेंद पर छक्का उसके बाद फिर एक रन। मिलर ने आखिरी गेंद पर दो रन लिये। 18 वें ओवर में 25 रन बने। अब 12 गेंदों पर 23 रन चाहिए थे। 19 में ओवर में ब्रावो ने फिर कमाल किया। उन्होंने राशिद खान और अल्जारी जोसेफ का विकेट लेकर गुजरात को बड़ा झटका दिया। रन भी दिये सिर्फ दस। अब मैच आखिरी ओवर के रोमांच में दाखिल हुआ। 6 गेदों पर 13 रन की दरकार थी। गुजरात के सात विकेट गिर चुके थे और सारी निगाहें मिलर पर टिकी थीं। गुजरात की जीत अब मिलर पर निर्भर थी।

आखिरी ओवर में यूं पलटा मैच
आखिरी ओवर में मिलर ने दिलायी जीत 20वें ओवर की पहली दो गेंदों पर जब कोई रन नहीं बना तो गुजरात के समर्थकों की धड़कनें तेज होने लगीं। गुजरात पर हार का खतरा मंडराने लगा। लेकिन मिलर तो मिलर थे। उन्होंने तीसरी गेंद पर छक्का जमा दिया। चौथी गेंद पर मिलर शॉर्ट थर्ड मैन पर कैच हो गये लेकिन वह नो बॉल थी। किस्मत ने साहसी मिलर का साथ दिया। अब तीन गेंदों पर छह रन चाहिए थे। चौथी गेंद फिर फेंकी गयी जिस पर मिलर ने चौका जड़ दिया। पांचवीं गेंद पर दो रन लेकर मिलर ने गुजरात को हारती हुई बाजी जीता दी। उन्होंने अपनी सेंचुरी के लिए छक्का लगाने की कोशिश नहीं की। टीम की जीत के लिए दौड़ कर ही रन ले लिया। वे 94 रनों पर नाबाद रहे। इस पारी ने मिलर को नये सांचे में ढाल दिया। वे शुरू से एक विस्फोटक बल्लेबाज थे लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं थी थी। जिस मुश्किल वक्त में उन्होंने अपनी टीम के लिए 94 रन बनाये उससे उनका खोया हुआ आत्मविश्वास फिर लौट आया। फिर तो वे गुजरात के लिए मैच जिताऊ पारियां खेलने लगे।

2022 में गुजरात क्यों खास है मिलर के लिए ?
डेविड मिलर ने 2017 में बांग्लादेश के खिलाफ टी-20 मैच में सिर्फ 35 गेंदों पर शतक ठोक कर इतिहास रचा था। लेकिन उनके खेल में एकरूपता नहीं रही है। कभी हिट, कभी फ्लॉप। इसकी वजह से उन पर भरोसा करना मुश्किल होता है। जब 2022 में खिलाड़ियों की नीलामी हो रही थी तब पहले दिन किसी टीम ने उन्हें खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखायी। यहां तक कि उनकी पुरानी टीम राजस्थान ने भी उन्हें नहीं पूछा। उनकी बेस प्राइस एक करोड़ रुपये थी। नीलामी के दूसरे दिन राजस्थान को मिलर की याद आयी। लेकिन गुजरात ने 3 करोड़ रुपये में मिलर को खरीद लिया। पहले दिन अनसोल्ड रहे मिलर को गुजरात ने अपने साथ जोड़ कर उन्हें एक नया मंच दिया। गुजरात ने उनकी इज्जत बचा ली। डेविड मिलर ने 2012 के आइपीएल में छह मैच खेले थे और उनका सर्वेच्च स्कोर था 34 रन। 2013 में किंग्स इलेवन पंजाब ने उन्हें 6 करोड़ रुपये में खरीदा था। पंजाब से जुड़ कर उन्होंने शानदार खेल दिखाया था। उन्होंने बेंगलुरु के खिलाफ केवल 38 गेंदों में शतक लगा कर तहलका मचा दिया था। 2013 में उन्होंने पंजाब के लिए 418 रन बनाये थे। 2014 का सीजन उनके लिए अच्छा रहा। पंजाब की टीम फाइनल तक पहुंची थी। पंजाब ने उन्हें 2016 में कप्तान भी बनाया था। लेकिन उनके कप्तान बनते ही पंजाब छह में पांच मुकाबले हार गया। तब उन्हें कप्तानी से हटा कर मुरली विजय को कप्तान बनाया गया था। 2020 में नीलामी के पहले पंजाब ने उन्हें रिलीज कर दिया था। मिलर की साख कम होती गयी तो कीमत भी घटती गयी। 2020 में राजस्थान ने उन्हें केवल 75 लाख रुपये में खरीदा था। अगले साल भी राजस्थान ने उन्हें इसी कीमत पर खरीदा। 2021 में मिलर ने राजस्थान के लिए 8 पारियों में सिर्फ 124 रन बनाये थे। इस खराब प्रदर्शन के चलते ही 2022 में राजस्थान ने उन्हें पहले दिन खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी थी। लेकिन गुजरात ने उनके डूबते आइपीएल करियर को न केवल बचा लिया बल्कि बुलंदी पर पहुंचा दिया।












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