इंग्लैंड के बैटर रोमांटिक हीरो से बने ‘एंग्री यंग मैन’, बदल रहे टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा

नई दिल्ली, 07 जुलाई। क्या इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट की नयी परिभाषा गढ़ रहा है ? इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स का एक बयान काबिले जिक्र है। एजबेस्टन टेस्ट जीतने के बाद स्टोक्स ने कहा, हम टेस्ट क्रिकेट के तरीके को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। पांच सप्ताह पहले तक 378 एक लक्ष्य कठिन था। लेकिन अब ऐसा नहीं है।

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चौथी पारी में अब कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं। इस सोच के साथ हम टेस्ट क्रिकेट को नया जीवन देना चाहते हैं। पिछले एक महीने से यही कोशिश कर रहे हैं। हम नयी पीढ़ी को प्रेरित करना चाहते हैं। नये प्रशंसक बनाना चाहते हैं। और सबसे बड़ी बात ये कि हम क्रिकेट पर अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं। तो क्या स्टोक्स ने यह जताने की कोशिश की कि टेस्ट क्रिकेट पहले उबाऊ था और अब हम उसे रोमांचक बनाने की कोशिश कर रहे हैं ? क्या टेस्ट क्रिकेट को भी वन डे और टी-20 की तरह आक्रामक बनाने की तैयारी है?

कॉपीबुक स्टाइल में खेलना

कॉपीबुक स्टाइल में खेलना

क्रिकेट में टेस्ट मैच को ही उसका मौलिक स्वरूप माना जाता है। टेस्ट क्रिकेट का एक तय सिलेबस है। सिलेबस के मुताबिक उसका अलग व्याकरण है। किस गेंद को कैसे खेलना है, इसके लिए तय दिशानिर्देश है। इस दिशा निर्देश के लिए किताब है। इस किताब के मुताबिक बल्लेबाजी को ही श्रेष्ठ माना जाता है। तब प्रशंसा में कहा जाता है अमुक बल्लेबाज कॉपीबुक स्टाइल में खेलता है। अपेक्षा की जाती है कि बल्लेबाज कट, पुल या ड्राइव भी जमीन के सहारे खेलें। ऑफ और मिडिल स्टंप की गेंद को रक्षात्मक तरीके से खेलना है। ऑफ स्टंप से बाहर जाती गेंदों से छेड़खानी बड़ी गलती है। हवा में ऊंचे शॉट खेलना गलत है। इस मानक से पांच दिनों तक मैच चलता था। फिर भी नतीजा नहीं निकलता था। अधिकतर टेस्ट मैच ड्रा हो जाते थे। चौथी पारी में पांचवें दिन 250 से अधिक का स्कोर कठिन लक्ष्य माना जाता था। पहले तो टीम के कोच भी नहीं होते थे। टीम के मैनेजर ही प्रशासकीय और अनुशासन की जिम्मेदारी संभालते थे। तब भला कौन बताता कि चौथी पारी के 50 ओवर में 299 रन बना कर भी टेस्ट मैच जीता जा सकता है ?

रोमांटिक हीरो से एंग्री यंग मैन बने इंग्लिश बल्लेबाज

रोमांटिक हीरो से एंग्री यंग मैन बने इंग्लिश बल्लेबाज

इंग्लैंड के नये कोच ब्रेंडन मैकुलम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने बल्लेबाजों को यही तो सिखाया था। टेस्ट क्रिकेट के लिए यह एक क्रांतिकारी सोच थी। स्टोक्स इसी बात का जिक्र कर रहे थे। टेस्ट क्रिकेट में प्रतिओवर 5.98 के रनरेट से बैटिंग स्टोक्स के दाव में दम है। इंग्लैंड सचमुच टेस्ट क्रिकेट को नये सांचे में ढाल रहा है जिसमें रोमांच का जबर्दस्त मिश्रण है। इंग्लैंड ने लगातार चौथी बार चौथी पारी में 275 से अधिक रन बना कर चार टेस्ट मैच जीते हैं। ये कोई तीर-तुक्का नहीं। हर बार बाजी पलटने की ताकत दिखायी है। इंग्लिश बल्लेबाज अब रोमांटिक हीरो से एंग्री यंग मैन न चुके हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने चौथी पारी में 279 रन बना कर पांच विकेट से जीत हासिल की थी। दूसरे टेस्ट मैच में उसने चौथी पारी केवल 50 ओवर में ही 299 रन बना कर इतिहास रच दिया। टेस्ट मैच में प्रति ओवर 5.98 के रनरेट से स्कोर करना क्या आठवां आश्चर्य नहीं है ?

ताबड़तोड़ बैटिंग से छा गए रूट और पोप

ताबड़तोड़ बैटिंग से छा गए रूट और पोप

अगर कोई दावा कर रहा है कि हम टेस्ट मैच के ग्रामर को बदलने के लिए खेल रहे हैं तो इसमें गलत क्या है ? कितने हैरत की बात है कि जो टेस्ट ड्रॉ की तरफ जा रहा था वह न्यूजीलैंड हार गया। तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड को चौथी पारी में 296 रनों का टारगेट मिला था। उसने फिर कमाल किया। केवल 54.2 ओवर में 296 रन बना कर यह टेस्ट 7 विकेट से जीत लिया। दूसरी बार इंग्लैंड ने टेस्ट मैच में प्रतिओवर 5.44 या इससे अधिक के रनरेट से जीत का लक्ष्य हासिल किया। टेस्ट मैच में लगातार ऐसी तूफानी बैटिंग इसके पहले कभी नहीं देखी गयी। इंग्लैंड के 'एंग्री यंग मैन' जॉनी बेयरेस्टो और बेन स्टोक्स तो पहले से 'एंग्री यंग मैन' थे। लेकिन उनको देख कर जो रूट, ओली पोप भी बदल गये। रूट और पोप रोमांटिक हीरे से एंग्री यंग मैन बन गये। ताबड़तोड़ बैटिंग इनकी नयी पहचान बन गयी।

378 का लक्ष्य छू नहीं सका भारत

378 का लक्ष्य छू नहीं सका भारत

एजबेस्टन टेस्ट में चौथे दिन इनिंग ब्रेक तक भारत का पलड़ा भारी था। चौथी पारी में इंग्लैंड को 378 रनों का टारगेट मिला था। चूंकि पहली पारी में वह 284 रन ही बना सका था इसलिए 378 के लक्ष्य को कठिन माना जा रहा था। लेकिन इंग्लैंड ने अपने नये तेवर के दम पर जबर्दस्त पलटवार किया। चौथे दिन का खेल खत्म हुआ तो इंग्लैंड का स्कोर था 3 विकेट के नुकसान पर 259 रन। बेयरेस्टो 72 और रूट 76 पर खेल रहे थे। इन दोनों ने मिल कर भारत के हार की पटकथा चौथे दिन ही लिख दी थी। पांचवें दिन जीत पर मुहर लग गयी। रूट जैसे रक्षात्मक खिलाड़ी ने 136 गेंदों पर शतक बना लिया। बेयरेस्टो ने 138 गेंदो पर शतक ठोका। पांचवें दिन इंग्लैंड को जीत के लिए केवल 119 रनों की दरकार थी जिसे रूट और बेयरेस्टो ने केवल 19.4 ओवर में बना लिये। इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ भी चौथी पारी में 4.93 प्रतिओवर की दर से रन बनाये। टेस्ट क्रिकेट में लगातार इतनी तेज लगातार इतनी तेज बैटिंग पहले कल्पना से परे बात थी। लेकिन अब हकीकत है। भारत इंग्लैंड की इसी आक्रामक नीति का शिकार हुआ। भारत के गेंदबाज क्यों नहीं 378 के लक्ष्य की रक्षा कर पाये ? ये विश्लेषण का अलग मुद्दा है।

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