Dhanashree Verma: धनश्री के परिवार ने बोला सफेद झूठ? चहल से पैसे लेकर कर दिया गेम
Dhanashree Verma: धनश्री वर्मा और युजवेंद्र चहल का तलाक पर फैसला गुरुवार को मुंबई की फैमिली कोर्ट में आना है। हाई कोर्ट ने तुरंत इस मामले को निपटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कूलिंग ऑफ़ पीरियड समाप्त करते हुए प्रक्रिया आगे बढाने के बारे में कहा है क्योंकि दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया है।
इस बीच बार एंड बेंच की रिपोर्ट में धनश्री को मिलने वाली एलिमनी रकम को लेकर बड़ा खुलासा हो गया है। इससे पहले इस रकम को लेकर अफवाहें उड़ती रहती थी। कहा जा रहा था कि धनश्री को 60 करोड़ की रकम मिलने वाली है लेकिन ऐसा नहीं था।

धनश्री को चहल से मिलने वाली राशि 4 करोड़ 75 लाख रुपये है। इसमें से चहल ने 2 करोड़ 37 लाख की धन राशि दे भी दी है और बची हुई रकम फैसला आने के बाद दे देंगे। इस तरह 60 करोड़ वाली सभी बातों को विराम लग जाता है। धनश्री के परिवार ने चहल से मिलने वाली रकम को लेकर एक बार बयान दिया था।
उसमें कहा गया था कि 60 करोड़ रकम सिर्फ अफवाह है। हमने ना कोई ऐसी डिमांड की है और ना हमें कोई रकम ऑफर हुई है। इससे लोगों को यही लगा कि दोनों ने आपसी सहमति से तलाक लिया है, तो कोई रकम नहीं दी जाएगी। धनश्री के परिवार ने आधा सच बताया और बाकी चीजें छिपा ली।
धनश्री के परिवार ने 60 करोड़ का तो मना कर दिया था लेकिन यह नहीं बताया कि 4 करोड़ 75 लाख में से 2 करोड़ 37 लाख रुपये आ चुके हैं। इसमें कहीं न कहीं झूठ तो है क्योंकि जब 60 करोड़ का खंडन किया था, तो पूरे अमाउंट को लेकर बयान दिया था लेकिन उसमें करीबन 5 करोड़ तो आ ही रहे थे, उस पर चुप्पी साधकर काम चला लिया।
Dhanashree Verma के परिवार से क्या कहा गया था?
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ धनश्री के परिवार ने उस समय कहा था कि गुजारा भत्ता को लेकर किये जा रहे आधारहीर दावों से हम नाराज हैं। ऐसी किसी राशि के बारे में हमसे नहीं पूछा गया है और ना ही इस बारे में की डिमांड की गई है। इन अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। यहाँ तक तो ठीक था लेकिन जो रकम मिल रही है, उस पर चुप्पी साधकर पूरे अमाउंट पर बयान देकर निकल जाना गलत है। यह भी कहा जा सकता था कि 60 करोड़ नहीं करीबन 5 करोड़ की रकम मिलेगी या मिल सकती है।
Dhanashree Verma और चहल रहते थे अलग
बताया जा रहा है कि धनश्री और चहल ढाई साल से अलग रह रहे थे। कोर्ट को यही बताया गया था लेकिन फैमिली कोर्ट ने फिर भी छह महीने सुलह वाला टाइम देने की बात कही थी। उस पर बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया गया और उच्च न्यायालय ने 20 मार्च का दिन तय कर दिया।












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