IPL इतिहास के 6 सबसे खराब अंपायरिंग फैसले, मैदान पर मचा बवाल, कैप्टन कूल से एंग्री यंगमैन बन गए थे धोनी
6 Worst Umpiring Decisions in IPL History: आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) क्रिकेट के जगत में एक बड़ा और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है। लेकिन आईपीएल के दौरान अंपायरिंग पर कई विवाद उठ चुके हैं, जिनकी वजह से खेल की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। यहां हम आईपीएल के कुछ ऐसे विवादों के बारे में बात करेंगे जब खराब अंपायरिंग की वजह से मैदान पर बवाल मच गया था।
राजस्थान रॉयल्स बनाम दिल्ली डेयरडेविल्स (2012)
इस मैच में एक विवादास्पद फैसला लिया गया था जब अंपायर ने एक नो-बॉल को नजरअंदाज कर दिया, जिस पर बल्लेबाज ने बड़ी शॉट मारी थी। उस समय की टीम दिल्ली डेयरडेविल्स के कप्तान वीरेंद्र सहवाग ने अंपायर से इस पर आपत्ति जताई, लेकिन इसे सही ठहराया गया। इससे खेल में अंपायरिंग के मानक पर सवाल उठे थे।

मुंबई इंडियंस बनाम पुणे वॉरियर्स (2014)
इस मैच में एक अंपायरिंग गलती की वजह से बहुत बड़ा विवाद हुआ था। मुंबई इंडियंस के बल्लेबाज ने एक गेंद पर छक्का मारा, लेकिन अंपायर ने इसे नो-बॉल करार नहीं दिया, जिससे मैच में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस फैसले के बाद यह माना गया कि अंपायरों ने स्टैंडर्ड का पालन नहीं किया।
किंग्स इलेवन पंजाब बनाम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (2015)
इस मैच में एक कैच को लेकर विवाद हुआ था। अंपायर ने एक शॉट को "नॉट आउट" दिया, जबकि टेलीविजन रिप्ले ने यह दिखाया कि गेंद बल्ले से लगकर सीधे फील्डर के हाथों में गई थी। इस फैसले ने अंपायरिंग के फैसलों पर सवाल उठाए और मैच की निष्पक्षता पर शंका पैदा की।
कोलकाता नाइट राइडर्स बनाम चेन्नई सुपर किंग्स (2018)
इस मैच में एक विवादास्पद LBW (लैग-बिफोर विकेट) निर्णय पर बहस हुई थी। अंपायर ने एक गेंद को आउट करार दिया था, जबकि रिप्ले में यह दिखा कि गेंद स्टंप्स के बाहर जा रही थी। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में कई आलोचनाएं बटोरीं और अंपायरिंग के निर्णय पर सवाल उठाए।
मुंबई इंडियंस बनाम दिल्ली कैपिटल्स (2020)
इस मैच में एक बल्लेबाज को आउट दिए जाने पर विवाद हुआ था। अंपायर ने बल्लेबाज को रन आउट करार दिया, जबकि रिप्ले में यह साफ था कि बल्लेबाज क्रीज के अंदर था। इस फैसले से मैच की दिशा प्रभावित हुई और अंपायरिंग पर चर्चा शुरू हो गई।
राजस्थान बनाम चेन्नई सुपर किंग्स (2019)
साल 2019 के दौरान सवाई मानसिंह स्टेडियम में हुए इस मैच में धोनी का गुस्सा देखने को मिला। इसके साथ ही उन्हें अंपायर से बहस करते हुए भी देखा गया। मामला यह था कि जब आखिरी ओवर में CSK को जीतने के लिए 8 रन की जरूरत थी, और स्टोक्स ने मिच सैंटनर को एक फुल टॉस गेंद डाली, तो यह गेंद पहली नजर में ही कमर से ऊपर दिखाई दी। स्क्वायर लेग अंपायर उथास गांधे ने नो बॉल का इशारा किया, लेकिन मुख्य अंपायर ब्रूस ओक्सेनफर्ड ने इस फैसले को बदल दिया, जिससे धोनी नाराज हो गए। जिसके बाद धोनी मैदान पर आकर अंपायर से बहस करने लगे।












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