Sonbhadra News: मुख्य चिकित्साधिकारी को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने किया सस्पेंड, जानें क्या है पूरा मामला
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरतने के मामले में सोनभद्र के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सस्पेंड कर दिया है। उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी भी दी है।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा Sonbhadra के मुख्य चिकित्सा अधिकारी रमेश सिंह ठाकुर को अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरतने के चलते निलंबित कर दिया गया है। सीएमओ को निलंबित करने की जानकारी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा ट्वीट करके दी गई है। डिप्टी सीएम द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी पर की गई कार्रवाई के बाद सोनभद्र जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों में हड़कंप मची हुई है।

निरीक्षण के दौरान मिली थी भारी अनियमितताएं
यह भी बता दें कि उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक बीते 6 फरवरी को सोनभद्र जनपद में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए आए थे। सोनभद्र में बार एसोसिएशन के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल होने के अलावा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने समीक्षा बैठक की थी। समीक्षा बैठक के दौरान सोनभद्र जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था में भारी अनियमितताएं देखने को मिली थी। इसके अलावा यह भी बताया जा रहा है कि जिले में कई फर्जी अस्पताल संचालकों द्वारा धड़ल्ले से अस्पताल चलाए जा रहे हैं और सीएमओ से इसकी शिकायत करने के बावजूद भी उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही थी। सोनभद्र दौरे के दौरान भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं तथा अन्य लोगों द्वारा डिप्टी सीएम से भी इसकी शिकायत की गई थी। बताया जा रहा है कि शिकायत में यह बात सही पाए जाने के बाद डिप्टी सीएम भरत शर्मा के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।
पूर्वांचल में फर्जी चिकित्सालयों की बाढ़
यह भी बता दें कि पूर्वांचल के लगभग सभी जनपदों में इस समय काफी संख्या में फर्जी चिकित्सालय संचालित किए जा रहे हैं। पिछले साल वाराणसी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी संदीप चौधरी द्वारा जिले के दर्जनों फर्जी चिकित्सालय पर कार्रवाई की गई। इसके बावजूद भी वाराणसी में फर्जी चिकित्सालय चलाने वालों द्वारा मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, भदोही, मऊ, बलिया, कुशीनगर, देवरिया, आजमगढ़ समेत सभी जनपदों में धड़ल्ले से फर्जी नर्सिंग होम और हॉस्पिटल संचालित किए जा रहे हैं। लोगों द्वारा यह भी कहा जाता है कि फर्जी नर्सिंग होम और हॉस्पिटल संचालकों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मोटी रकम दी जाती है, जिसके चलते ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है।












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