गजब का टैलेंट : दोनों हाथों से लिखने वाले अद्भुत बच्चों की कहानी, 5 भाषाओं का ज्ञान
Singrauli News : दुनिया में अधिकतर लोग दांए हाथ से लिखते हैं। क्या आपको पता है कि केवल दस प्रतिशत लोग ऐसे होते हैं जो बाएं हाथ से लिखते हैं। बाए हाथ का उपयोग करने वालों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और टॉम क्रूज जैसी शख्सियत शामिल है। लेकिन ऐसे कम ही लोग हैं जो दोनों हाथों से लिखने की क्षमता रखते हैं। दोनों हाथों से लिखने वाली संख्या कुल जनसंख्या की 10% है। आपको जानकर हैरानी होगी है कि सिंगरौली जिले में एक ऐसा स्कूल है जहां 100 विद्यार्थी हैं और सभी दोनों हाथों से लिखते हैं। इनमें से कुछ विद्यार्थी ऐसे हैं जो कि एक समय में दोनों हाथों से अलग-अलग भाषा लिखने की क्षमता रखते हैं।
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पांच भाषाओं का ज्ञान
ग्राम बुधेला के वीणा वादिनी पब्लिक विद्यालय में पढ़ने वाले यह विद्यार्थी दोनों हाथों से 1 साथ इतने निपुण हैं कि इनकी कलम भी रफ्तार से चलती है। इन्हें क्लास के किसी भी कार्य को करने में सामान्य बच्चे से आधा समय लगता है। वे हिंदी,उर्दू, स्पेनिश, संस्कृत, अंग्रेजी, में दोनों हाथों से लिख लेते हैं। इन विद्यार्थियों को कोई हैरी पॉटर वाला जादूगर 'वॉल्ट मोर' तो कोई 'थ्री इडियट्स' फिल्म का 'प्रोफेसर वीरू सहस्त्रबुद्धे' फिल्म कहता है। विद्यार्थियों को यह हुनर उनके स्कूल में सिखाया है।

1999 को खुली थी स्कूल
सिंगरौली जिले बुधेला गांव में एक प्राइवेट विद्यालय की नींव यहां के निवासी वीरंगद शर्मा ने एक अनोखी सोच के साथ 8 जुलाई 1999 को रखी थी। इससे कुछ सप्ताह पहले वीरंगद जबलपुर में सेना का प्रशिक्षण ले रहे थे। वीरंगद शर्मा ने जानकारी दी कि 1 दिन जबलपुर रेलवे स्टेशन पर 1 किताब मैंने पढ़ा कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद दोनों हाथों से लिखते थे। ऐसा कैसे हो सकता है, इस जिज्ञासा ने और खोजबीन करने की प्रेरणा दी। यह खयाल इतना पुख्ता हुआ कि कुछ दिनों में सेना की ट्रेनिंग छोड़ दिया। खोजने पर उन्हें पता चला कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के विद्यार्थी औसतन प्रतिदिन 32,000 शब्द लिखने की क्षमता रखते थे. इस पर पहले हमें विश्वास नहीं हो रहा था। लेकिन इतिहास खंगाला तो कई जगह इसका उल्लेख मिला. बस इसी जिज्ञासा के साथ स्कूल की नींव पड़ गई।

दोनों हाथों से लिखने में दिमांग होता है तेज
यह एक साधना की तरह है. , योग, ध्यान, दृढ़ संकल्प होकर लक्ष्य पाया जा सकता है। इसलिए विद्यालय में योग और ध्यान भी करीब 2 घंटे तक रोज सिखाया जाता है। दोनों हाथों से 1 साथ लिखने से याद रखने की क्षमता बढ़ती है। दिमाग तेज होता है और सबसे बड़ी बात टाइम की बचत होती है। इसी के बलबूते छात्र एक से 100 तक की गिनती उर्दू में 45 सेकंड में, 1 मिनट में रोमन में, 1 मिनट में देवनागरी लिपि में लिख लेते हैं। 1 मिनट में 2 भाषाओं के 250 शब्दों का अनुवाद कर देते हैं। 1 मिनट में 17 तक का पहाड़ा लिख लेते हैं। 1 हाथ 2 का पहाड़ा लिखता है तो दूसरा हाथ तीन का। फिर पहला हाथ 4 तो दूसरा हाथ 5 का पहाड़ा लिखना शुरू कर देता है।

इसके पीछे विज्ञान का तर्क
सिंगरौली जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉक्टर आशीष पाण्डेय ने जानकारी दी कि हमारा दिमाग ब्रेन 2 हिस्सों में बटा होता है, ब्रेन का लेफ्ट हिस्सा राइट हिस्से को कंट्रोल करता है और लेफ्ट हिस्सा राइट हिस्से को नियंत्रित करता है। इसी के हिसाब से लोग लेफ्ट राइट हिस्से से कार्य करते है, लेकिन 1 प्रतिशत ऐसे भी लोग होते हैं जो दोनों हाथ से 1 साथ कार्य करते है, उन्हें क्रॉस वार्य कहते है। उनके दोनों हिस्से 1 साथ कार्य करने के लिए विकसित होते है और उनका पूरे ब्रेन पर 1 साथ कंट्रोल होता है।

मनोचिकित्सक आशीष पाण्डेय
मनोचिकित्सक आशीष पाण्डेय ने जानकारी दी कि जब किसी बच्चें का ब्रेन विकसित हो रहा होता है, तो उस समय ब्रेन 1 शार्प की तरह होता है, जैसे कोई कुम्हार घड़ा बनाता है तो उसे जैसी डिजाइन देता है वह उसे डिजाइन में बन जाता है। उसी प्रकार ब्रेन भी होता है।












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