MP News: सीधी में पंचायत मंत्री राधा सिंह को नजरअंदाज, गोपालदास बांध के जीर्णोद्धार का हुआ भूमि पूजन
MP News: प्रदेश की पंचायत-ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह को सीधी जिले में गोपालदास बांध के जीर्णोद्धार के भूमि पूजन कार्यक्रम में न बुलाए जाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। यह कार्यक्रम मंगलवार शाम को आयोजित किया गया था, जिसमें विधायक रीति पाठक, जिला पंचायत अध्यक्ष और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए थे।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राधा सिंह को आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि गोपालदास बांध का जीर्णोद्धार पंचायत विभाग की योजना के तहत होना है और मंत्री के पास इस विभाग की जिम्मेदारी है।

इस मामले ने राजनीतिक रूप से तूल पकड़ लिया है, और महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष कमलेश सिंह ने सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह एक गलत परंपरा है। उन्होंने कहा कि मंत्री को इस कार्यक्रम में न बुलाना और उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज करना असभ्य और अनुचित है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, भाजपा पर लगाया आदिवासियों के प्रति द्वेष का आरोप
कांग्रेस ने राधा सिंह को कार्यक्रम में न बुलाने की घटना की तीखी आलोचना की है। कांग्रेस के सीधी जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने कहा कि यह घटना भाजपा की आदिवासी समुदाय के प्रति द्वेषभावना को उजागर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासी समुदाय के हित की बात तो करती है, लेकिन उनके नेता और जनप्रतिनिधियों का इस तरह अपमान करना भाजपा के असली चेहरे को सामने लाता है। कांग्रेस ने इस मामले में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और कहा कि मंत्री के अपमान को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला पंचायत सीईओ ने कहा- जनप्रतिनिधियों का आदर जरूरी
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला पंचायत के सीईओ अंशुमान राज ने कहा कि हर जनप्रतिनिधि का आदर होना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह मामला ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ा है और कार्यक्रम में राधा सिंह को न बुलाए जाने पर उन्होंने कहा कि हम इसकी समीक्षा करेंगे। सीईओ ने कहा कि भविष्य में इस तरह की स्थिति नहीं बनेगी और सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से बुलाया जाए।
सीधी में गोपालदास बांध के जीर्णोद्धार के भूमि पूजन कार्यक्रम में मंत्री को न बुलाए जाने की घटना ने प्रदेश में राजनीतिक हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, वहीं जिला पंचायत के अधिकारियों ने इसे सुधारने का आश्वासन दिया है। यह मामला अब यह तय करेगा कि भविष्य में जनप्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा के लिए प्रशासन और सरकार क्या कदम उठाती है।












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