राजद्रोह के अलावा भी कई कानूनों का गलत इस्तेमाल करते हैं राजनीतिक दल

Provided by Deutsche Welle

नई दिल्ली, 16 मई। केतकी चितले ने फेसबुक पर मराठी में किसी और की लिखी एक कविता डाली थी जिसमें एक ऐसे शख्स की आलोचना है जिसका चित्रण एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार से मिलता जुलता है. किरदार का उपनाम पवार है, उम्र 80 साल है और उसे कुछ ऐसी बीमारियां भी हैं जिनसे शरद पवार भी ग्रसित हैं.

इस फेसबुक पोस्ट के लिए ठाणे पुलिस की अपराध शाखा ने 29 साल की चितले के खिलाफ आईपीसी की धारा 500 (मानहानि), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 153ए (दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया.

Recommended Video

      SC Stays Sedition Law: किन बड़े चेहरों पर दर्ज है देशद्रोह ? क्या होगी उनकी रिहाई ? | वनइंडिया हिंदी

      सभी पार्टियां शामिल

      रविवार 15 मई को अदालत की छुट्टी के दिन उन्हें एक अवकाश मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया जहां मजिस्ट्रेट ने उन्हें 18 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया. इसी तरह अहमदाबाद पुलिस ने फिल्म निर्देशक अविनाश दास के खिलाफ उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर एक मामला दर्ज लिया है.

      कथित रूप से शरद पवार के खिलाफ फेसबुक पोस्ट डालने के लिए केतकी चितले को गिरफ्तार किया गया

      दास ने हाल ही में धन शोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार की गई आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी.

      इसी तरह कुछ ही दिनों पहले पंजाब पुलिस ने बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के खिलाफ टिप्पणी करने के लिए दिल्ली में अचानक गिरफ्तार कर लिया था.

      राजद्रोह से मानहानि तक

      उससे पहले कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवानी को असम पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ट्वीट के लिए गिरफ्तार कर लिया था. ये सभी मामले दिखाते हैं कि भले ही राजद्रोह जैसी धारा पर सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी रूप से रोक लगा दी हो, ऐसे और भी कई कानून हैं जिनका राजनीतिक दल आलोचना की आवाजों को दबाने के लिए गलत इस्तेमाल करते हैं.

      जिग्नेश मेवानी को ट्विटर पर प्रधानमंत्री की आलोचना करने के लिए गिरफ्तार किया गया

      मानहानि से जुड़े कानून ऐसे ही उदाहरणों में शामिल हैं. आईपीसी की धारा 499 के तहत मानहानि एक अपराध है, जिसके लिए दोषी पाए जाने पर जुर्माना और दो साल की जेल की सजा का प्रावधान है.

      2020 में मद्रास हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा था सरकारी मुलाजिमों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपने प्रतिद्वंदियों को परेशान करने के लिए मानहानि कानून का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. लेकिन इसके बावजूद कानून का मनमाना इस्तेमाल आज भी जारी है.

      Notifications
      Settings
      Clear Notifications
      Notifications
      Use the toggle to switch on notifications
      • Block for 8 hours
      • Block for 12 hours
      • Block for 24 hours
      • Don't block
      Gender
      Select your Gender
      • Male
      • Female
      • Others
      Age
      Select your Age Range
      • Under 18
      • 18 to 25
      • 26 to 35
      • 36 to 45
      • 45 to 55
      • 55+