Sagar: 1100 साल से विराजे सूर्य भगवान जब अचानक गायब हो गए थे! कर्क रेखा पर बना अनोखा सूर्य मंदिर
मध्य भारत में 1100 साल से ऐतिहासिक व इकलौते मंदिर में विराजे भगवान सूर्य नारायण एक दिन अचानक गायब हो गए थे! पुजारी जब मंदिर पहुंचे सूर्य भगवान की प्रतिमा गायब थी... कई महीनों पर उन्हें यूपी के मथुरा से वापस लाया गया था। दरअसल सागर के रहली में देहार नदी किनारे चंदेल कालीन सूर्य मंदिर मौजूद है। यहां से करीब 11 साल पहले तस्करों ने प्रतिमा चोरी कर ली थी। 5 फीट 3 इंच ऊंची प्रतिमा को विदेश में बेचने की तैयारी थी।

मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहली में कर्क रेखा पर मौजूद देश का एकमात्र सूर्य मंदिर आस्था का केंद्र है। पुरातत्व विभाग के अधीन यह मंदिर को करीब 1100 साल पहले चंदेल वंश के राजाओं में बनवाया था। मंदिर में कई खासियत भी हैं। मान्यता है कि पूर्व मुखी सूर्य मंदिर में 7 अश्वों से युक्त रथ में सवार भगवान सूर्य पर सूरज की पहली किरण पड़ती हैं। वास्तु शहतीर कला का यह मंदिर बेजोड़ उदाहरण हैं।
अंतरराष्ट्रीय तस्कर सूर्य प्रतिमा को उखाड़ ले गए थे
रहली के अनोखे और देश के इकलौते कर्क रेखा पर बने इस सूर्य मंदिर पर अंतर राष्ट्रीय मूर्ति तस्करों की नजर भी लग चुकी है। करीब 11 साल पहले मार्च के महीने में तस्कर मंदिर से 5 फीट 3 इंच व 2 फीट 8 इंच चौड़ी इस प्रतिमा को उखाड़ ले गए थे। मशक्कत के बाद प्रतिमा यूपी के मथुरा में पुलिस ने तस्करों से बरामद की थी। उसके बाद सागर लाकर फिर स्थापित किया गया है।
सात घोड़ों से युक्त रथ पर सवार हैं सूर्य भगवान
रहली में देहार नदी के किनारे शहतीर कला से बने मंदिर में भगवान सूर्य की प्रतिमा रथ पर सवार है। रथ में सात घोड़ों जुते नजर आते हैं। माना जाता है कि ये घोड़े सात वर्णों का प्रतीक हैं। इस प्राचीन सूर्य प्रतिमा में सूर्य की दो पत्नियां भी विराजमान हैं। वहीं दरबार में एक तरफ कुबेर और दूसरी तरफ भगवान विष्णु की प्रतिमा है। मंदिर में महाश्वेता देवी अभय की मुद्रा में स्थापित हैं साथ ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश की त्रिमूर्ति विराजमान हैं।












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