Chhatarpur: एक्सीडेंट में बेटा चल बसा, तेरहवीं के बजाय अस्पताल को दिए उपकरण, गरीब कन्याओं का विवाह करेंगे
सागर, 3 अगस्त। मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा बनने से पहले ही एक जवान बेटा पिता को छोड़कर दुनिया से रुखसत हो गया। पिता ने दिल पर पत्थर रखकर बेटे का कर्मकांड व विधि-विधान से पूजा पाठ कराया, लेकिन तेरहवीं भोज कराने के बजाय यह राशि अस्पताल में सुविधाएं व संसाधन उपलब्ध कराने में खर्च कर दी। गरीब कन्याओं के विवाह के लिए भी उन्होंने 50 हजार रुपए राशि दी है।

छतरपुर मे एक पिता अपने बेटे की मौत पर तेरहंवी भोज बंद कर उस राशि से गरीब व असहाय को सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज की व्यवस्था दिलाने में खर्च कर अनोखी मिसाल पेश की है। छतरपुर निवासी बैंक के रिटायर्ड अधिकारी काशीराम सोनी के बेटे शिवम का बीते दिनों एक सड़क हादसे में निधन हो गया था, जवान बेटे की असमय हुई मौत से सदमे आए परिजन ने तय किया कि वह अपने बेटे की मौत के बाद तेरहवीं का कार्यक्रम नहीं करवाएंगे, बल्कि अस्पताल मे जरुरतमंदों को सामान देकर और पीडित मरीजों को सामग्री देकर बेटे की स्मृतियों को यादगार बनाएंगे और समाजसेवा के पुनीत कार्य करेंगे। बता दें कि काशीराम सोनी के जवान बेटे शिवम की बीते दिनों सडक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

पलंग, स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, गमले दिए
काशीराम सोनी बुधवार को अपने परिजन के साथ जिला अस्पताल सामग्री प्रदान करने पहुंचे थे। वे अस्पताल के चार पलंग, छह सीलिंग फैन, दो स्टेचर, दो व्हीलचेयर, पांच गमले लेकर अस्पताल पहुंचे और यहां उन्होंने सिविल सर्जन को यह सामग्री अस्पताल के लिए प्रदान की है।

गरीब कन्याओं के विवाह के लिए 50 हजार दिए
काशीराम सोनी ने बेटे की स्मृति में सोनी समाज के गरीब परिवार की कन्याओं के विवाह कराने के लिए एक मुश्त 50 हजार रुपए समाज में दान किए हैं, ताकि गरीब की बेटी का घर बस सके। काशीराम सोनी ने बताया कि हमें समाज में रहकर समाज के साथ भी चलना है, इसलिए तेरहवीं के बजाय गंगाजलि पूजन, ब्राह्मण भोज व कन्याभोज कराया है। बाकी राशि समाज की गरीब कन्याओं के विवाह, अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सामग्री प्रदान करने में खर्च की है।












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