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Sagar: MLA के सवाल पर मंत्रियों का जवाब, स्टेट यूनिवर्सिटी, पर्यटन स्थल का कोई प्रपोजल पेंडिंग नहीं

मप्र के सागर में नई स्टेट यूनिवर्सिटी खोलने और राजघाट को पर्यटन क्षेत्र बनाने की प्लानिंग फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है। वर्षों से उठ रही प्रमुख मांगों पर विभागों ने सरकार को एक भी प्रस्ताव नहीं भेजा है।

विधायक के सवाल पर मंत्रियों का जवाब, कोई प्रपोजल पेंडिंग नही

सागर से भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन ने वर्तमान विधानसभा सत्र के दौरान सागर से जुड़े दो महत्वपूर्ण सवाल सदन में उठाए थे। इसमें सागर में नए राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना और राजघाट बांध को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करना। दोनों प्रश्नों के जवाब संबंधित मंत्रियों की तरफ से आए कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है। हैरत की बात तो यह है कि सत्तापक्ष भाजपा के पदाधिकारी, नेता, विधायक, मंत्री ही इन्हीं मांगों को वर्षों से उठाते आ रहे हैं। इन पर लगातार आश्वासन भी मिलते रहे हैं। बावजूद इसके सरकार के पर्यटन मंत्रालय और उच्च शिक्षा मंत्रालय में एक कागज तक नहीं पहुंचा, यह आश्चर्यजनक बात है। बता दें कि सागर की लाइफ लाइन मानी जाने वाली राजघाट जलावर्धन परियोजना में बांध की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर खुद मुख्यमंत्री ढाई सौ करोड़ रुपए के प्रावधान की घोषणा कर चुके हैं। चंद महीनों पहले सागर गौरव दिवस कार्यक्रम में यह घोषण मंच से की गई थी।

Rajghat Bandh


मप्र के सागर में पेयजल सप्लाई के लिए 1999-2003 में राजघाट जलावर्धन योजना प्रारंभ की गई थी। इसके दूसरे चरण में साल 2012 में बांध की दो मीटर ऊंचाई बढ़ाई जानी थी। लेकिन यह काम हो नहीं सका। पहले कमलनाथ सरकार ने 100 करोड़ और ​नवंबर में शिवराज सिंह चौहान ने 250 करोड़ देने का आश्वासन दिया था। इसी प्रकार राजघाट बांध पर पर्यटन स्थल विकसित करने, रिसॉर्ट बनाने का प्लान साल 2017 से चल रहा है। इधर सागर में राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर करीब 13 साल से मांग उठ रही है, बार-बार आश्वासन मिलते रहे हैं। ​भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन और मंत्री से लेकर तमाम नेता यह मांग उठा रहे थे। लेकिन विधानसभा में दोनों विभागों के मंत्रियों के जवाब से सागर को निराशा हाथ लगी है।

डॉ. गौर विवि सेंट्रल होने के बाद से मांग उठ रही थी

शहर के डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद से ही सागर में राजकीय विश्वविद्यालय की मांग की जा रही है। कई संगठन इस मांग को जनप्रतिनिधियों के समक्ष भी रख चुके है। मामले में कई आश्वासन भी मिले लेकिन अभी तक इस मसले में कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ पाया है। हाल में ही विधायक शैलेंद्र जैन ने विधानसभा सत्र के दौरान राजकीय विश्वविद्यालय को खोलने का प्रश्न सदन में रखा जिसके जवाब में शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

सागर में जब डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं मिला था तब संबंधित विश्वविद्यालय के काम यहीं से हो जाते थे। जैसे ही विश्वविद्यालय केंद्रीय हुआ तो मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियन 1973 के तहत महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर को विश्वविद्यालय बना दिया गया। तब से सभी काम वहीं से किए जा रहे है। इसके बाद से ही सागर में विश्वविद्यालय की मांग को लेकर संगठनों ने अपनी बात नेताओं तक पहुंचाई। चुनावी एजेंडे में राजकीय विश्वविद्यालय को रखा गया। ऐसे में अब विधानसभा में रखे गए सवाल के बाद क्या सागर में विश्वविद्यालय स्थापित हो पाएगा इसको लेकर अब संशय की स्थिति बन गई है। जबकि संभागीय मुख्यालय होने के साथ यहां विश्वविद्यालय की सबसे ज्यादा मांग है।

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    मैं एक ​बार फिर मुख्यमंत्री से चर्चा करुंगा
    शहर में राजकीय विद्यालय की बेहद आवश्यकता है। इस मामले को लेकर मैं एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा करूंगा। ताकि विश्वविद्यालय स्थापित हो सके।
    - शैलेंद्र जैन, विधायक, सागर

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