Kuno National Park मादा 'चीता आशा' डेढ़ हफ्ते तक तफरी के बाद वापस लौटी
कूनो नेशनल पार्क ने मादा चीता आशा के कोर एरिया में वापस आने के बाद राहत की सांस ली है। एक्सपर्ट की टीमें लगातार उसके पीछे घूम रही थीं। आशा के गर्भवती होने की संभावना जताई जा रही है, इस कारण प्रबंधन काफी चिंतित था।

देश में टाइगर प्रोजेक्ट के पहले चरण में नामीबिया से भारत लाई गई मादा 'चीता आशा' आखिरकार डेढ़ हफ्ते तक श्योपुर कूनो से शिवपुरी जिले की तक घूमकर वापस कूनो पहुंच गई है। बीती रात वह खुद ही कोर एरिया के फ्री रेंज में पहुंच गई। चीता पवन की तरह उसने भी लंबे इलाके को घूमकर वह वापस आई है।
कूनो प्रबंधन द्वारा जारी की गई जानकारी अनुसार मादा चीता आशा बीते 26 अप्रैल को कूनो नेशनल पार्क के क्षेत्र से बाहर चली गई थी। इस दौरान उसने इलाके के अगरा, विजयपुर, पोहरी इलाके में विचरण किया। यहां करीब वह 7 दिन तक रुकी रही। यह वही इलाका है, जहां पूर्व में नर चीता पवन भी घूमता रहा है। कुल मिलाकर मादा चीता आशा लगभग उन्हीं इलाकों में घूमती रही है, जहां पर पहले नर चीता ने आमद दर्ज कराई थी। अच्छी बात यह रही कि मादा चीता बस्ती इलाके और खेतों से दूरी बनाए रही थी।
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आशा गर्भवती है या नहीं, अब भी बना संशय
मादा चीता आशा गर्भवती है या नहीं इसको लेकर अब भी संशय बना हुआ है। प्रबंधन को लग रहा था कि मई के पहले हफ्ते में आशा शावकों को जन्म दे सकती है, हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। आशा के पार्क क्षेत्र से बाहर जाने के बाद उसे ट्रेंकुलाइज इसीलिए नहीं किया गया, क्योंकि उम्मीद थी कि वह गर्भवती है। संभव है आशा का आर्बाशन हो गया हो या वह गर्भवती हुई ही न हो!












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