MP Election 2023: रीवा सीट पर 20 साल से रहा बीजेपी का कब्जा, BSP बिगाड़ती रही कांग्रेस का खेल
MP Election 2023:
MP Election 2023: मध्य प्रदेश का रीवा विंध्य क्षेत्र की राजधानी हुआ करता था। लेकिन 1956 में विंध्य प्रदेश का विलय मध्यप्रदेश में कर दिया गया।जिसके बाद से अब तक रीवा विधानसभा हाई प्रोफाइल सीट बनी हुई है।
रीवा विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है और यहां से पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला 20 साल से विधायक हैं। लगभग 2 लाख मतदाताओं वाली सीट रीवा जिले के अंतर्गत आने वाली आठ विधानसभा सीटों में से एक है। और इस लोकसभा सीट पर 2019 में भाजपा को जीत मिली थी।

रीवा से फिलहाल राजेंद्र शुक्ल पिछले 20 सालों से यहां से विधायक हैं। 2003 में उन्होंने कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह को पराजित किया था। विधानसभा चुनावों में इस सीट पर बीजेपी की यह पहली जीत थी। इसके बाद राजेंद्र शुक्ल यहां से लगातार बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते रहे। पिछले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी यहां दूसरे नंबर पर रही थी। जबकि कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई थी।रीवा सीट पर कांग्रेस को बहुजन समाज पार्टी की उपस्थिति से नुकसान उठाना पड़ जाता है और दोनों की जंग में जीत भाजपा के खाते में चली जाती है। पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से यहां बसपा और कांग्रेस के बीच जंग जारी है।
उल्लेखनीय है कि एक समय रीवा विधानसभा सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाने लगा था। लेकिन 2003 के चुनाव के बाद से यहां कांग्रेस का लगभग सफाया ही हो चुका है। भाजपा के पास राजेंद्र शुक्ल जैसा दमदार चेहरा है तो वहीं कांग्रेस के पास चेहरे की तलाश जारी है।
रीवा सीट पर ब्राह्मण वर्ग के वोटरों का बोलबाला है। 11 फीसदी एससी, 6 फीसदी एसटी वर्ग के मतदाता है। रीवा सीट पर राजेंद्र शुक्ला का दबदबा है। 2003 से 2018 तक के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र शुक्ला की लगातार जीत दर्ज कर रहे है।
1-2018 में भाजपा के राजेंद्र शुक्ला
2-2013 में भाजपा के राजेंद्र शुक्ला
3-2008 में भाजपा के राजेंद्र शुक्ला
4-2003 में भाजपा के राजेंद्र शुक्ला
5-1998 में निर्दलीय पुष्पराज सिंह
6-1993 में कांग्रेस से पुष्पराज सिंह
7-1990 में कांग्रेस से पुष्पराज सिंह
8-1985 में जेएनपी प्रेमलाल मिश्रा
9-1980 में कांग्रेस से मुनी प्रसाद
10- 1977 में जेएनपी प्रेमलाल मिश्रा
रीवा विधानसभा वोटरों की संख्या की बात करें तो निर्वाचन आयोग की ताजा आंकड़ों को मुताबिक यहां तीन लाख 10 हजार के पार हैं। जिसमें एक लाख 61 हजार पुरुष मतदाता और एक लाख 49 हजार महिला मतदाता है।
रीवा में भाजपा, कांग्रेस, बसपा के साथ-साथ आम आदमी पार्टी भी ताल ठोक रही हैं। भाजपा जहां अपने गढ़ को बरकरार रखने के जद्दोजहद कर रही है। वहीं, कांग्रेस अपनी सीटें बढ़ाने की कोशिश में है। लेकिन बहुजन समाजवादी पार्टी की उसकी राह में सबसे बड़ी रोड़ा बनी हुई है। रीवा जिले की आठ विधानसभा सीटों पर हमेशा की तरह इस बार भी क्षेत्रीय समीकरण हावी रह सकते हैं।












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