रीवा का इको पार्क पानी के बहाव में क्यों डूब गया? 2016 में आई बाढ़ से जुड़ी इस ग्राउंड रिपोर्ट से समझिए
Rewa Eco Park: मध्य प्रदेश के बीहर नदी के टापू में बना इको पार्क पहली बारिश में ही जमींदोज की कगार पर पहुंच चुका है। वन इंडिया हिंदी की टीम ग्राउंड में जाकर हकीकत जानने का प्रयास किया है। जिसमें लोगों ने इको पार्क को बड़े नुकसान की आशंका जाहिर की है।
रीवा में पिछले दिनों भीषण बारिश के बाद पीपीपी माडल पर बनाए गए इस पार्क का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। बीहर नदी नदी के टापू पर बनाए गए पार्क में पानी चारों ओर से जमा हो गया है। जिसकी वजह से टापू के कुछ हिस्सों का कटाव भी हुआ है। पुल के ऊपर से लोग नदी के जलस्तर की फोटो खींचते दिखाई दिए, नदी के ग्रीन बेल्ट एरिया में कराए गए निर्माण की वजह से ईको पार्क लंबे समय से विवादित रहा है।

दरअसल,नगर निगम से इसके निर्माण को लेकर अनुमति नहीं ली गई, जिसकी वजह से रीवा के महापौर भी इसके निर्माण पर सवाल उठाते रहे हैं। इसके पहले 19 अगस्त 2016 को रीवा में आई बाढ़ के चलते झूला पुल सहित कई नुकसान यहां पर हो चुका है। अब फिर से शासन की अनुमति के बाद यहां पर ईको पार्क का निर्माण कराया गया है।
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लोगों ने बताया कि ईको पार्क के भीतर जिस तरह से पानी भरा है। उससे माना जा रहा है कि आने वाले कई दिनों तक पानी निकलने के बाद भी यह उपयोग के लायक नहीं रहेगा। यहां पर नए सिरे से मरम्मत कार्य कराना होगा।
इस मामले में महापौर अजय मिश्रा बाबा वन इंडिया हिंदी से कहा कि उनकी आशंका सही साबित हो रही है। क्योंकि नदी के ऐसे हिस्से में निर्माण कराया गया है। जहां पर खतरे की आशंका पहले से थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में वह लगातार कहते रहे हैं कि बीहर नदी के डेंजर वाले हिस्से में कोई निर्माण नहीं हो। ईको पार्क में अस्थाई निर्माण कराया जा सकता था लेकिन यहां पर मनमानी की गई है।
ईको पार्क में नियमों की अनदेखी को लेकर लगातार शिकायत करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक शिव सिंह ने कहा है कि प्रकृति की अनदेखी की गई है। इस कारण अभी चेतावनी मिली है। इसके बाद भी नहीं सुधरे तो हालात और खराब हो सकते हैं। सिंह ने कहा कि सत्ता के अहंकार में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला यह भूल गए कि प्रकृति सर्वोपरि है। नदी के किनारे को पहुंचाए गए नुकसान पर कार्रवाई की मांग उठाई गई है।












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