पाकिस्तान से रिहा हुए गुजराती ने दी 11 साल से लापता मछुआरे की खबर, घरवालों में जगी ​लौटने की आस

Gujarat News , गिरसोमनाथ। पाकिस्तान द्वारा तीन-चार समूहों में रिहा किए गए 355 भारतीय मछुआरे अपने-अपने घर लौट चुके हैं। इनमें से एक गुजराती मछुआरे ने एक आशाजनक खबर दी है। पुनाभाई गोविंदभाई भांभणिया नाम के मछुआरे ने 11 साल से लापता मछुआरे कालू गोहिल को पाकिस्तानी कैद में होने का दावा किया है। गोविंदभाई का कहना है कि कालू गोहिल न सिर्फ जिंदा है बल्कि वहां सुरक्षित भी है।

गोविंदभाई ने यह बातें कालू गोहिल के परिजनों को बताईं। उसकी यह बातें सुन परिजनों की कालू गोहिल के जीवित लौट आने की आशा बंध गई। कालू गोहिल के भाई ने गोविंदभाई को कालू की तस्वीर दिखाई थी, जिसे देखकर वह चौंक गया था। इसके बाद गोविंदभाई ने कालू के बारे में कई जानकारी शेयर कीं।

लापता मछुआरे के परिजनों ने दिखाई फोटो तो चौंक गया वह

लापता मछुआरे के परिजनों ने दिखाई फोटो तो चौंक गया वह

कालू गोहिल के परिजनों के मुताबिक, 17 नवम्बर 2008 को मछली पकड़ते समय कालू समुद्र में गिर गया था। तब से उसका कोई अता-पता नहीं है। उसका भाई धीरू गोहिल गिरगड्ढ़ा के जामवाळा गांव में एक रेस्टोरेंट चलाता है। मंगलवार को उसके रेस्टोरेंट पर कुछ लोग आए, इनमें हाल ही में पाकिस्तान से रिहा होकर आया कारेनी गांव का पुना गोविंद भांभणिया भी शामिल था। उनसे पाकिस्तान की बातें करते वक्त धीरूभाई ने अपने लापता भाई कालू की तस्वीर दिखाई।तस्वीर देखते ही मछुआरा बोला ये तो वहां के जेलर का खास आदमी है।

पाकिस्तान में कराची की मरीनलाधी जेल में सुरक्षित है कालू

पाकिस्तान में कराची की मरीनलाधी जेल में सुरक्षित है कालू

कालू की तस्वीर देखकर पुना गोविंद चौंक उठा। उसने बताया कि यह फोटोवाला शख्स तो पाकिस्तान की जेल में स्थित जेलर का खास आदमी है। उनकी बातें सुनकर धीरू की आंखों में भी चमक आ गई और वर्षों बाद फिर से भाई कालु के वापस लौटने की आस बंध गई। मीडिया से की गई बातचीत में धीरू ने बताया कि पुनाभाई ज्यादा कुछ तो नहीं बता पाए। लेकिन इतना स्पष्ट हो गया कि कालूभाई पाकिस्तान में कराची की मरीनलाधी जेल में सुरक्षित है।

'पैर में कोई पुरानी मोच के कारण कालू लंगड़ाकर चलता है'

'पैर में कोई पुरानी मोच के कारण कालू लंगड़ाकर चलता है'

पाकिस्तान से लौटे मछुआरे पुनाभाई भांभणिया ने धीरू को बताया कि, कालू बिल्कुल अनपढ़ है और वो सही से कोई बात बता नहीं पाता है। लेकिन मरीनलाधी जेल के जेलर का काफी नजदीकी है, क्योंकि उसके अधिकांश काम वो ही करता है। उसके पैर में भी कोई पुरानी मोच है जिससे वह लंगड़ाकर चलता है। यह सब जानने के बाद धीरू गोहिल समेत लापता कालु के परिजनों को फिर से उसके पाकिस्तान से छूटकर घर आने की आस बंध गई है।

अब रिहाई की हर संभव कोशिश की जाएगी: धीरूभाई गोहिल

अब रिहाई की हर संभव कोशिश की जाएगी: धीरूभाई गोहिल

जानकारी मिलने के बाद से ही जामवाला गांव में कालू की मां फुलुबेन और उसकी पत्नी गीताबेन समेत तीनों बच्चे भी भगवान का शुक्र मनाने लगे है और भगवान से उनके लौटने की प्रार्थना करने लगे है। बतादे की एक समय परिजनों ने कालू को समुद्र में डूबने या किसी बड़ी मछली के खा जाने की आशंका में अंतिम क्रिया भी पूरी कर ली थी। धीरूभाई के मुताबिक एक बार फिर उसके वहां होने की पुख्ता जानकारी मिली है, तो उसकी रिहाई की हरसंभव कोशिश भी फिर से की जाएगी।

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विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज और विधानसभा तक पहुंचा था मामला

विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज और विधानसभा तक पहुंचा था मामला

पिछले वर्षो में भारत से पाकिस्तान पहुंचे गुजरात के मछुआरों की रिहाई के लिए कई प्रयास किए गए। जिसमें समुद्र श्रमिक सुरक्षा संघ, उना तहसील पंचायत, कांग्रेस विधायक पूंजा वंश समेत नवसारी के सांसद सीआर पाटिल भी सक्रिय रहे थे। उसी समय कालुके भाई धीरू ने सीआर पाटिल से उसकी रिहाई की गुहार लगाई थी और विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज को भी मामले की जानकारी दी गई थी। इतना ही नहीं मामला विधानसभा तक भी पहुंचा, लेकिन कालु की पुख़्ता जानकारी नहीं होने के कारण बात आगे नहीं बढ़ सकी।

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