LokSabha Election: क्या मोदी मैजिक से डरे कांग्रेसी ? राजस्थान में लोकसभा चुनाव लड़ने से कर दिया इनकार
LokSabha Election: राजस्थान में लोकसभा चुनावों में 25 सीटों में से कई सीटों पर भाजपा-कांग्रेस-बसपा के साथ बीएपी पार्टी ने अपने- अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए है।
एक ओर जहां भाजपा के केंद्रीय मंत्री से लेकर वर्तमान सांसदों के साथ नए नेता राजस्थान के चुनावी रण में उतरने को तैयार बैठे है वहीं दूसरी ओर मोदी मैजिक से डरे हुए दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने इससे दूरी बना ली है।

राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों पर भाजपा के चार केंद्रीय मंत्रियों के साथ 15 प्रत्याशी सांसद का चुनाव लड़ने के लिए चुनावी रण में उतर चुके है वहीं 10 सीटों पर टिकट के इंतजार में कई धुरंधर नेता तैयारी कर रहे है।
हालांकि कांग्रेस ने कई राज्यों में शशि थरूर से लेकर भूपेश बघेल को टिकट दिया है लेकिन राजस्थान में एक भी दिग्गज नेताओं का नाम लिस्ट में नहीं आया है।
इससे माना जा रहा है कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने आलाकमान को संकेत दे दिया कि वो इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते है।
इन संकेतों का असर हाल ही में जारी हुई कांग्रेस की दूसरी लिस्ट में साफ देखा जा रहा है जहां एक भी दिग्गज कांग्रेसी नेता का नाम इस लिस्ट में नहीं आया है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि इस बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आलाकमान को संदेश भेजा था कि वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते है।
आपकों बता दे कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों में अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत जोधपुर से चुनाव लड़े थे और गजेंद्र सिंह शेखावत से चुनाव हार गए थे।
वहीं इस बार वैभव गहलोत ने हार के डर से उसकी सीट बदल कर जालौर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया है।
चर्चा तो यह भी थी पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट,भंवर जितेंद्र सिंह को भी आलाकमान चुनाव लड़वाना चाहता था। लेकिन लिस्ट में नाम नहीं आने से यह साफ हो गया है कि नेताओं के इनकार के बाद यह फैसला ले लिया गया है।
बिते दिनों जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से पत्रकारों ने यह सवाल किया था तो उन्होने भी यहीं कहा था कि अगर कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के लिए कहेंगे तो उस पर विचार करेंगे लेकिन उम्र एक बड़ी बाधा है। उसका ध्यान रखा जाएगा।
एक खेमे में चर्चा तो यह भी है कि जो कांग्रेस के पूर्व मंत्री,पूर्व सांसद, पूर्व विधायक भाजपा में शामिल हुए है वह भी मोदी मैजिक का ही कमाल है।
जिसके चलते राजस्थान में कांग्रेस के एक बड़े धड़े ने एक साथ भाजपा का दामन थाम लिया। वहीं एक मात्र नाराज भाजपा के सांसद राहुल कस्वां के कांग्रेस में शामिल होने से नेता गाल बजा रहे है वह तो अपने मूहं मिया मिठ्ठू बनने वाली कहावत को चरितार्थ करना मात्र समझा जा रहा है।
हालांकि राजस्थान के रण में अभी भाजपा के 10 ओर धुरंधरों के मैदान में उतरने का इंतजार है तो वहीं कांग्रेस को अभी भी 15 सीटों पर अपने प्रत्याशियों का चयन करना है। जो आलाकमान के लिए टेड़ी खीर बनता हुआ नजर आ रहा है।












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