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अटल लेखिनी बोल रही है- इस तीर्थराज के लिए अधूरा ही रह गया हृदय रत्न का ये सपना

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अजमेर। देशवासियों के दिलों में बसने वाले हृदय रत्न प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चल बसने से पूरा देश सदमे में है। अब उनकी यादें दिलों में बसी रहेंगी। उनकी अमर लेखिनी की कुछ पंक्तियां बता रही हैं कि एक तीर्थराज को लेकर उनका एक सपना अधूरा ही रह गया। उनकी यादों के बीच से उनके हाथ का लिखा एक नोट सामने आया, जिसने वायपेयी की तीर्थराज पुष्कर झील को लेकर संवेदना को जाहिर किया। उनका दिल बेचैन था कि तीर्थराज पुष्कर को जल से परिपूर्ण कैसे रखा जाए। इसका समाधान नहीं मिल पाने को लेकर वे काफी चिंतित थे। उन्होंने पुष्कर में ही ये बात अपने हाथ से बड़े ही साधारण शब्दों में काफी मार्मिक तरीके से लिखी।

the desire of atal bihari vajpayee to fulfill the terthraj pushkar with water is Incomplete

बात 26 साल पुरानी है। अटल बिहारी वाजपेयी तीर्थराज पुष्कर में अराधना करने के लिए 12 नवम्बर 1992 को पहुंचे थे। यहां उन्होंने हिन्दू आस्था के प्रतीक इस पवित्र पुष्कर सरोवर में पूजा-अर्चना की और सरोवर में डूबकी भी लगाई। पुष्कर सरोवर में पूजा सम्पूर्ण करने के बाद पंडे की पोथी में अपने हाथ से लिखा था कि पुष्कर सरोवर आने का सुअवसर मिला। सरोवर को जल से परिपूर्ण कैसे रखा जाए इस समस्या का स्थाई समाधान अभी तक नहीं मिला है। प्रयास जारी रहना चाहिए। उनके हाथ की लिखी ये पंक्तियां बता रही हैं कि वे तीर्थराज को लेकर कितने गम्भीर थे। उन्हें इस तीर्थराज में पानी कम होने से चिंता सताए जा रही थी। उस दौरान 3 साल में वे दो बार पुष्कर यात्रा पर आए। वर्ष 1992 से पहले वे 1989 में भी पुष्कर आए थे।

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अटल बिहारी वाजपेयी को ऐसी ही संवेदनशीलता के कारण जाना जाता रहेगा। यही उनके जीवन का मजबूत पक्ष रहा कि उन्होंने हर धर्म के लोगों के बीच रहकर उनके दिलों में अपनी जगह बना ली। समय गवाह है कि उनकी नाजुक स्थित में उनके स्वस्थ होने के लिए पुष्कर में प्रार्थना हो रही थी, तो अजमेर की ख्वाजा गरीब नवाज में दुआओं का दौर चल रहा था। पुष्कर और ख्वाजा गरीब नवाज दोनों में ही उनकी बड़ी आस्था रही। उनकी ओर से देश की तरक्की व अमन-चैन के लिए हर साल उर्स के दौरान ख्वाजा गरीब नवाज को चादर पेश होती रही। गली-गली दुआओं और प्रर्थनाओं के दौर के बावजूद अटल बिहारी का अंतिम समय नहीं टल सका। ईश्वर उन्हें अपने पास बुलाना चाह रहा था। उन्होंने नई दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में गुरूवार शाम 5 बजकर 5 मिनट पर इस जमीन पर अंतिम सांस ली। मृत्यु से पहले वे पिछले नौ हफ्ते से अस्पताल में भर्ती रहे।

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the desire of atal bihari vajpayee to fulfill the terthraj pushkar with water is Incomplete
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