रूमा देवी: राजस्थान की वो ग्रामीण महिला जिसने अमेरिका में छात्रों को पढ़ाया, अब दुनिया को देंगीं लेक्चर

बाड़मेर। राजस्थान के बाड़मेर की रूमा देवी अमेरिका पहुंच चुकी हैं। यहां पर दो दिवसीय हावर्ड इंडिया कांफ्रेस में हिस्सा लेने से पहले रूमा देवी हावर्ड यूनिवर्सिटी के बच्चों को पढ़ाने का मौका मिला। राजस्थान के एक छोटे से गांव की महिला का अमेरिका के विश्वविद्यालय में लेक्चर हो ना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

ये लोग आएंगे भी डिया कांफ्रेस में

ये लोग आएंगे भी डिया कांफ्रेस में

बता दें कि दुनियाभर की जानी-मानी हस्तियां की मौजूदगी में 15 व 16 फरवरी को रूमा देवी 17वीं हावर्ड इंडिया कांफ्रेस के मंच से बतौर मुख्य वक्ता करीब एक हजार शिक्षाविदों, छात्रों और युवा उद्यमियों से मुखातिब होंगी। कांफ्रेस में भारत से जुड़े समकालीन विषयों पर संवाद, परिचर्चा और लोगों को जोड़ने के दुनिया के सबसे बड़ों मंचों में से एक है। कांफ्रेस में रूमा देवी के अलावा गैरी क्रिस्टन, केन्द्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कबीर खान, अरूण पुरी व अनुपम खेर आदि भी हिस्सा ले रहे हैं।

रूमा ने राजस्थान की हस्त शिल्प कला पर डाला प्रकाश

रूमा ने राजस्थान की हस्त शिल्प कला पर डाला प्रकाश

अमेरिका की हावर्ड यूनिवर्सिटी में बच्चों को पढ़ाने के दौरान रूमा देवी ने उनको राजस्थान के थार रेगिस्तान के हस्तशिल्प व सांस्कृतिक महत्व के बारे में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए समझाया। इसमें रूमादेवी ने राजस्थान व बाड़मेर की भौगोलिक विशेषताओं पर प्रकाश डालकर सिंधु घाटी कालीन शिल्प कलाओं के बारे में भी बताया। इसके अलावा हावर्ड विश्वविद्यालय के छात्रों को उन्होंने राजस्थान की ढाणियों, वाणी गायन, घूमर नृत्य के साथ-साथ केर सांगरी की विशेषताओं से भी रू-ब-रू करवाया।

 कशीदाकारी का अभ्यास करवाया

कशीदाकारी का अभ्यास करवाया

लेक्चर के बाद रूमा देवी ने विद्यार्थियों के एक समूह को एप्लिक व मिरर वर्क के लिए कशीदाकारी का अभ्यास करवाया। इस दौरान ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान सचिव विक्रमसिंह, अंशु श्राफ व प्राजकता जोशी ने अनुवादन व प्रशिक्षण कार्य में सहयोगी के रूप में अपनी सेवाएं दी।

 बाड़मेर के कपड़ों का प्रदर्शन

बाड़मेर के कपड़ों का प्रदर्शन

रूमा देवी जोधपुर एयरपोर्ट से 11 फरवरी को अपने चार सदस्यीय दल के ​साथ अमेरिका के लिए रवाना हुई थीं। 13 फरवरी को अमेरिका की हावर्ड यूनिवर्सिटी में बोस्टन के पब्लिक एंड हेल्थ डिपार्टमेंट में दोपहर एक बजे कार्यशाला में प्रशिक्षण प्रदान किया। बाड़मेर की एप्लिक, एम्ब्रायडरी, अजरख प्रिंट आदि क्राफ्ट के कपड़ों का प्रदर्शन भी किया।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा रूमा देवी को बुलाने की वजह

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा रूमा देवी को बुलाने की वजह

राजस्थान में रूमा देवी संघर्ष, हिम्मत और कामयाबी की मिसाल है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित बाड़मेर के बेहद पिछड़े गांव मंगला बेरी की रूमा देवी वर्ष 2019 में देशभर में चर्चित शख्सियत भी रही हैं। पहले विश्व महिला दिवस 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों नारी शक्ति अवार्ड मिला। फिर जुलाई में रूमा देवी को डिजायनर ऑफ द ईयर 2019 का अवार्ड से नवाजा गया और सितंबर 2019 में रूमा देवी कौन बनेगा करोड़पति के कर्मवीर एपिसोड में भी रूमा देवी नजर आईं। केबीसी में 12 सवालों के जवाब देकर साढ़े बारह लाख रुपए जीते।

रूमा देवी 22 हजार महिलाओं को दे रही हैं रोजगार

रूमा देवी 22 हजार महिलाओं को दे रही हैं रोजगार

बाड़मेर की रूमा देवी की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर, जैलसमेर और बीकानेर के 75 गांवों की 22 हजार महिलाओं को रोजगार मुहैया करवा रही हैं। राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही रूमा देवी के नवाचारों के चलते इन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। रूमा देवी से जुड़े समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए कपड़ों की डिमांड इंटरनेशनल बाजार में भी बढ़ती जा रही है। लंदन, जर्मनी, सिंगापुर और कोलंबो के फैशन वीक्स में भी उनके उत्पादों का प्रदर्शन हो चुका है।

कौन हैं रूमा देवी, क्या है इनका संघर्ष

कौन हैं रूमा देवी, क्या है इनका संघर्ष

वर्ष 1988 में बाड़मेर के गांव रावतसर में खेताराम व इमरती देवी के घर जन्मीं रूमा देवी 7 बहन व एक भाई में सबसे बड़ी हैं। महज पांच साल की उम्र में मां इमरती देवी की मौत के बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली। रूमा देवी अपने चाचा के पास रहकर पली-बढ़ी। गांव के सरकारी स्कूल से आठवीं तक ​की शिक्षा पाई। उस समय गांव में दस किलोमीटर दूर से बैलगाड़ी पर पानी भरकर भी लाना पड़ता था।

जीवीसीएस एनजीओ की अध्यक्ष हैं रूमा देवी

जीवीसीएस एनजीओ की अध्यक्ष हैं रूमा देवी

17 साल की उम्र में बाड़मेर जिले के गांव मंगला बेरी निवासी टिकूराम के साथ रूमा की शादी हुई। इनके एक बेटा है लक्षित। रूमा देवी की जिंदगी में वर्ष 1998 में उस वक्त नया मोड़ आया जब ये ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर (जीवीसीएस) नाम के एनजीओ से जुड़ी। यह एनजीओ समूह बनाकर राजस्थानी हस्तशिल्प जैसे साड़ी, बेडशीट, कुर्ता समेत अन्य कपड़े तैयार करता है। रूमा देवी के कौशल, काम को लेकर लगन और मेहनत के चलते इस एनजीओ से 22 हजार महिलाएं जुड़कर रोजगार पा रही हैं। वर्तमान में रूमा देवी ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर की अध्यक्ष हैं।

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