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राजस्थान में रामभक्त हनुमान के चमत्कारिक मंदिर,जानिए पूरी खबर

ram mandir: आज देशभर में भगवान राम के रामलला स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा बड़ी विधिवत तरीके से सम्पन्न हो गई। लेकिन क्या आप जानते है राजस्थान में रामभक्त हनुमान के कई ऐसे चमत्कारिक मंदिर है जहां मनोकामनाएं पूरी होती है।

वैसे तो हिंदूस्तान में जब रामलला की ही स्थापना हो गई है तो फिर किसी ओर मंदिर और भगवान के बारे में चर्चा करना ज्यादा जरूरी नहीं है। लेकिन रामभक्त हनुमान की चर्चा होना लाजमी है।

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आज हम आपकों राजस्थान के ऐसे चमत्कारिक मंदिरों के बारे में बताएंगे जहां दुनियाभर से भक्त,श्रद्धालु आते है और उनकी हर मनोकामनाएं पूरी होती है ।

सबसे पहले बात करेंगे गुलाबी शहर के ऐतिहासिक चमत्कारिक खोले के हनुमान जी के मंदिर की। जयपुर में स्थित खोले के हनुमान जी का मंदिर का खास महत्व है। यहां श्रद्धालुओं के अलावा देश-विदेश से पर्यटक भी आते हैं।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में हनुमान जी के कई मंदिर हैं। लेकिन खोले के हनुमान जी मंदिर की अपनी एक अलग ही पहचान है। यहां श्रद्धालुओं के अलावा देशी-विदेशी पर्यटक भी प्रकृति की मनोरम छटा को निहारने के लिए दूर-दूर से आते है। 60 के दशक में शहर की पूर्वी पहाड़ियों की खोह में बहते बरसाती नाले और पहाड़ों के बीच निर्जन स्थान में जंगली जानवरों के डर से शहरवासी यहां का रूख भी नहीं कर पाते थे।

तब एक साहसी ब्राह्मण ने इस निर्जन स्थान का रूख किया और यहां पहाड़ पर लेटे हुए हनुमानजी की विशाल मूर्ति खोज निकाली। इस निर्जन जंगल में भगवान को देख ब्राह्मण ने यही पर मारूती नंदन श्री हनुमान जी की सेवा पूजा करनी शुरू कर दी और प्राणान्त होने तक उन्होंने वह जगह नहीं छोड़ी।

खोले के हनुमानजी के परमभक्त ब्राह्मण थे पंडित राधेलाल चौबे । चौबे के जीवनभर की अथक मेहनत का ही नतीजा है कि यह निर्जन स्थान आज सुरम्य दर्शनी स्थल बन गया । 1961 में पंडित राधेलाल चौबे ने मंदिर के विकास के लिए नरवर आश्रम सेवा समिति की स्थापना की। जब यह स्थान निर्जन था तब पहाड़ों की खोह से यहां बरसात का पानी खोले के रूप बहता था। इसीलिए मंदिर का नाम खोले के हनुमानजी पड़ा।भारत में श्री सालासर बालाजी मंदिर हनुमान-भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है। श्री सालासर बालाजी मंदिर राजस्थान के चूरू जिले में स्थित है और साल भर असंख्य भक्तों को आकर्षित करता है।भारत में हनुमान जी का यह एकमात्र मंदिर है, जिसमें हनुमान जी के दाढ़ी और मूँछ है।

सालासर धाम में प्रतिवर्ष दो मेले "शरद पूर्णिमा एवं चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जन्मोत्सव)" पर आयोजित होते हैं। श्री सालासर बालाजी धाम पूर्णतः आडम्बरविहीन देवस्थान है। यहां केवल भक्त का भगवान से सीधा सम्बन्ध है।

सालासर धाम में आने वाले सभी यात्रियों की सुविधा व धाम का विकास "श्री बालाजी मंदिर" के माध्यम से "श्री हनुमान सेवा समिति" द्वारा समुचित रूप से किया जाता है।

विश्वविख्यात सिद्धपीठ श्री सालासर धाम में यात्री सुविधार्थ 125 से भी अधिक आधुनिक सुविधाओं से युक्त धर्मशालाएँ यात्रियों को अहर्निश सेवायें प्रदान करती है और यहाँ खाने-पीने के लिए कई जलपान-गृह (रेस्त्रां) हैं।

मेहंदीपुर बालाजी - यह मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है। मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ती के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। बताया जाता है कि मेहंदीपुर धाम मुख्यत: नकारात्मक शक्ति एवं प्रेतबाधा से पीड़ित लोगों के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि नकारात्मक शक्ति से पीड़ित लोगों को यहां शीघ्र ही मुक्ति मिल जाती है।

इच्छापूर्ण बालाजी - राजस्थान के चूरू जिले के सरदारशहर में इच्छापूर्ण बालाजी का मंदिर है। इस मंदिर को दक्षिण भारत व पश्चिम बंगाल के कारीगरों ने द्रविड़ शैली पर मंदिर बनाया। इस मंदिर की चौखट पर धोक लगाने वालों हर इच्छा पूरी होती है।

समोद वीर हनुमानजी - जयपुर से थोड़ी दूर सामोद की पहाड़ियों पर वीर हनुमानजी का मंदिर अपने अनूठेपन के लिए जाना जाता है। पर्वत शिखर पर स्थित हनुमानजी के दर्शन करने के लिए करीब 1100 सीढ़ियां चढ़नी होती है।

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