राजस्थान बारिश रिपोर्ट कार्ड : पाली में अक्टूबर से चलेगी वाटर ट्रेन, 727 में से 276 बांध रह गए खाली

जयपुर, 3 सितम्बर। राजस्थान में मानसून 2021 विदाई की ओर है। अभी आधा सीजन बीता है, जो कई जगहों में बिन बरसे ही उम्मीदों पर पानी फेरने वाला रहा है। ऐसे में राजस्थान के 10 जिलों में मानसूनी की बेरुखी ने वहां के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इन जगहों पर जल संकट गहराता दिख रहा है।

पाली में अक्टूबर से चलेगी वाटर ट्रेन

पाली में अक्टूबर से चलेगी वाटर ट्रेन

राजस्थान मानसून 2021 के रिपोर्ट कार्ड की बात करें तो प्रदेश में अब तक कुल 727 में से 276 बांधी पूरी तरह से खाली रह गए हैं। पाली जिले में तो प्यास बुझाने के लिए वाटर ट्रेन चलाने की नौबत आने वाली है। पाली में वाटर ट्रेन का संचालन अक्टूबर से प्रस्तावित है।

 वाटर ट्रेन पर खर्च होंगे 200 करोड़

वाटर ट्रेन पर खर्च होंगे 200 करोड़

बता दें कि पानी में जलापूर्ति का मुख्य स्रोत जवाई बांध है, मगर इस बांध में भी बरसाती पानी की आवक अच्छी नहीं हुई है। फिलहाल जवाई बांध में महज दस फीट पानी बचा है। ऐसे में यहां पर एक अक्टूबर से वाटर ट्रेन का संचालन होगा। यह ट्रेन जोधपुर से पानी लेकर पाली पहुंचेगी। जोधपुर से पाली के बीच वाटर ट्रेन के संचालन पर 200 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे।

 चार दिन में एक बार पानी मिलेगा

चार दिन में एक बार पानी मिलेगा

बता दें कि पूर्व में भी पाली में वाटर ट्रेन चलाई जा चुकी है। 25 जुलाई 2019 में भी वाटर से ही पाली के लोगों की प्यास बुझाई गई थी। इस बार 2021 में एक अक्टूबर से चलने वाली वाटर ट्रेन से यहां के लोगों को चार दिन में एक बार पानी मिलेगा।

बिसलपुर बांध में सिर्फ 32 प्रतिशत पानी बचा

बिसलपुर बांध में सिर्फ 32 प्रतिशत पानी बचा

उधर, बात अगर जयपुर व इसके आस-पास के जिलों की करें तो यहां मानसून की बेरुखी रही है। जयपुर समेत चार जिलों की प्यास बुझाने वाला बिसलपुर बांध भी पूरा नहीं भरा है। फिलहाल इस बिसलपुर बांध में सिर्फ 32 प्रतिशत पानी बचा है।

एक बारिश में भरा जवाई बांध

एक बारिश में भरा जवाई बांध

इधर, पूर्व मुख्य अभियंता पीएचईडी जोधपुर प्रेमसुख शर्मा मीडिया से बातचीत में कहते हैं कि अगस्त 2013-14 में भी मानसून की बेरुखी देखने को मिली थी। इस बार भी पाली जिले के जवाई बांध का पानी 23 अगस्त को खत्म होने वाला था, मगर 23 व 24 अगस्त की रात को हुई बारिश से बांध पूरा भर गया है।

 उदयपुर संभाग में पेयजल संकट

उदयपुर संभाग में पेयजल संकट

बात अगर सबसे पेयजल संकट की बात करें तो वो माउंट आबू, जालौर, सिरोही, चित्तौड़गढ़ व उदयपुर संभाग में देखने को मिल रहा है। उदयपुर संभाग में बांधों में से 52.7 प्रतिशत ही पानी है। जबकि मानसून 2020 में अगस्त बीतने तक उदयपुर संभाग के बांध 75 फीसदी भरे हुए थे।

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