Rajasthan: सचिन पायलट ने BJP और AAP पर साधा निशाना, कहा-'दिल्ली चुनाव में महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे गायब'
Rajasthan News: कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान के दौरान महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित नहीं करने के लिए आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की आलोचना की। टोंक में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति ने जमीनी चिंताओं को दरकिनार कर दिया है।
कांग्रेस का रोडमैप और विकास का वादा
सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जनहित के मुद्दों पर फोकस किया है और लोगों के लिए एक संगठित रोडमैप पेश किया है। उन्होंने शीला दीक्षित के कार्यकाल के दौरान हुए विकास कार्यों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में उस समय हुए विकास कार्यों को लोग आज भी याद करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दिल्ली के मतदाता कांग्रेस के कार्यों को याद रखेंगे और पार्टी पर भरोसा करेंगे।

इंडिया ब्लॉक में एकता का संदेश
इंडिया ब्लॉक के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर अटकलों को खारिज करते हुए पायलट ने कहा कि भाजपा और उसके गठबंधन का विरोध करने वाली पार्टियां पूरी तरह से एकजुट हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्थानीय चुनावों में गठबंधन की गतिशीलता भिन्न हो सकती है।
राजस्थान सरकार पर गंभीर आरोप
सचिन पायलट ने राजस्थान में भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। पायलट ने कहा कि राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति कमजोर हो चुकी है और प्रशासन में नौकरशाही का वर्चस्व बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने कांग्रेस शासन के दौरान बनाए गए 17 नए जिलों में से 9 जिलों को बिना किसी पारदर्शी मानदंड के भंग कर दिया। पायलट ने पूछा कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसले बिना किसी स्पष्ट प्रक्रिया के कैसे लिए जा सकते हैं।
एसआई भर्ती परीक्षा विवाद पर सवाल
राजस्थान में एसआई भर्ती परीक्षा-2021 से जुड़े विवाद पर पायलट ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि जांच एजेंसी की सिफारिश के बावजूद परीक्षा क्यों रद्द नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पेपर लीक मामले में दबाव में है। गौरतलब है कि इस घोटाले में 50 प्रशिक्षु उप निरीक्षकों सहित कई व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
सचिन पायलट के बयानों का असर
सचिन पायलट की यह बयानबाजी न केवल दिल्ली में चुनाव प्रचार की रणनीति को प्रभावित करती है। बल्कि राजस्थान में भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है। उनकी टिप्पणियां यह रेखांकित करती हैं कि चुनावी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जरूरत है।










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