Rajasthan: मेवाड़ के महाराजा माने जाते हैं एकलिंग महादेव, यहां क्यों शीश नवाने आते हैं महाराणा, जानिए परंपरा
Rajasthan News: राजस्थान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर में एक ऐतिहासिक घटना घटी। जब विश्वराज सिंह मेवाड़ ने अपने पिता महेंद्र सिंह मेवाड़ की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मेवाड़ के 77वें महाराणा का पद संभाला। हालांकि यह परिवर्तन विवादों से मुक्त नहीं रहा। खासतौर पर उदयपुर के प्रतिष्ठित एकलिंग महादेव मंदिर और सिटी पैलेस से जुड़े मुद्दों ने इस अवसर को और जटिल बना दिया।
एकलिंग महादेव मंदिर विवाद
कैलाशपुरी में स्थित ऐतिहासिक एकलिंग महादेव मंदिर मेवाड़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रमुख केंद्र है। मेवाड़ के शासकों के लिए यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थल नहीं। बल्कि आध्यात्मिक संरक्षक का प्रतीक रहा है।

विश्वराज सिंह मेवाड़ के राज्याभिषेक के बाद सिटी पैलेस स्थित धूणी दर्शन को लेकर विवाद उभरा। मंदिर प्रशासन जो वर्तमान में महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित है। उन्होंने मंदिर में अवैध प्रवेश का मुद्दा उठाया और इसे प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है।
मेवाड़ के शासकों और एकलिंग महादेव का संबंध
प्रसिद्ध इतिहासकार और लोक संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू बताते हैं कि एकलिंग महादेव मंदिर मेवाड़ के शासकों के लिए सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं। बल्कि उनकी शक्ति और आध्यात्मिक संरक्षक का प्रतीक भी था। मेवाड़ के शासकों ने खुद को एकलिंगजी के दीवान के रूप में पेश किया। न कि राजा के रूप में। यह परंपरा महाराणा सांगा और महाराणा प्रताप जैसे ऐतिहासिक योद्धाओं के समय से चली आ रही है।
मंदिर का सबसे पुराना उल्लेख 971 ई. के शिलालेखों में मिलता है। 15वीं शताब्दी में महाराणा कुंभा और उनके पुत्र महाराणा रायमल के शासनकाल में मंदिर के महत्व को और बढ़ाने वाले दो पुराणों की रचना की गई। यह मंदिर न केवल मेवाड़ के शासन का केंद्र था। बल्कि यह एकता और ताकत का प्रतीक भी था। जिसने शासकों और प्रजा के बीच गहरे विश्वास और निष्ठा को दर्शाया।
सिटी पैलेस को लेकर विवाद
विश्वराज सिंह मेवाड़ के राज्याभिषेक के साथ सिटी पैलेस के धूणी दर्शन को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ। सिटी पैलेस वर्तमान में उनके चाचा अरविंद सिंह मेवाड़ के अधिकार क्षेत्र में है। जो महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल ट्रस्ट का संचालन करते हैं। इस मुद्दे ने मेवाड़ परिवार के आंतरिक संबंधों में तनाव को उजागर किया। हालांकि स्थानीय प्रशासन और परिवार के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।
मेवाड़ की परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर
मेवाड़ का इतिहास अपने गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। एकलिंग महादेव मंदिर मेवाड़ की संस्कृति का केंद्र बिंदु रहा है। इस मंदिर ने हमेशा धार्मिक, सांप्रदायिक और सामाजिक एकता को बढ़ावा दिया है। महाराणा हमीर, महाराणा सांगा, और महाराणा प्रताप जैसे योद्धाओं की परंपरा ने इस मंदिर को शक्ति और विश्वास का प्रतीक बनाया।
विश्वराज सिंह मेवाड़ का मेवाड़ के 77वें महाराणा के रूप में राज्याभिषेक मेवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को जीवित रखने का प्रतीक है। हाल के विवादों के बावजूद एकलिंग महादेव मंदिर का महत्व और उसका मेवाड़ की संस्कृति में योगदान अडिग है। यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है। बल्कि मेवाड़ के लोगों के लिए एकता और ताकत का प्रतीक भी बना हुआ है। विश्वराज सिंह मेवाड़ के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक परंपरा नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।












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