राजस्थान में शराब तस्करी से जुड़े 5500 से अधिक केस होंगे वापस, गृह विभाग ने जारी किए आदेश
राजस्थान सरकार ने लंबे समय से लंबित पड़े आबकारी अधिनियम-1950 से जुड़े मामलों पर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने यह घोषणा की है कि शराब तस्करी से जुड़े लगभग 5784 प्रकरणों को सशर्त रूप से वापस लिया जाएगा। गृह विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए।
गृह विभाग के विधि सचिव रवि शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि वित्त विभाग की संस्तुति पर सरकार ने यह निर्णय लिया है। इसके तहत अभियोजन विभाग के प्रदेशभर में तैनात उपनिदेशकों को निर्देशित किया गया है कि वे न्यायालयों में चल रहे इन प्रकरणों को चिन्हित करें और नियमानुसार वापसी के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करें।

किन मामलों को मिलेगी राहत?
- इस फैसले का लाभ केवल उन्हीं अभियुक्तों को मिलेगा जो कुछ तय शर्तों पर खरे उतरते हों।
- जिन मामलों में 30 जून 2025 तक आरोप पत्र दाखिल हो चुका हो।
- आरोपी ने आबकारी अधिनियम में पहली बार अपराध किया हो।
- जब्त की गई शराब की मात्रा अधिकतम 10 लीटर तक हो।
- ऐसे मामलों को अदालत से वापस लेने की अनुमति दी जाएगी। इस दायरे में आने वाले करीब 5784 मुकदमे चिह्नित किए जा चुके हैं।
सरकार का मकसद
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अदालतों में वर्षों से लंबित पड़े छोटे मामलों का बोझ घटेगा और पहली बार अपराध करने वालों को राहत मिलेगी। सरकार का तर्क है कि कम मात्रा की बरामदगी और पहली बार अपराध करने वालों को कड़ी कानूनी प्रक्रिया में उलझाना न्यायसंगत नहीं है। वहीं, बड़ी मात्रा में अवैध शराब से जुड़े गंभीर मामलों पर यह राहत लागू नहीं होगी।
राजस्थान सरकार का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने और अदालतों में पेंडेंसी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।












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