राजस्थान सरकार ने सरपंचों का कार्यकाल बढ़ाया, 'एक राज्य, एक चुनाव' मॉडल से होंगे पंचायत चुनाव!
Sarpanch Election Rajasthan 2025: राजस्थान सरकार ने 'एक राज्य, एक चुनाव' के लक्ष्य को लेकर अपनी पंचायत चुनाव प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत की है। इस कदम में मौजूदा सरपंचों का कार्यकाल बढ़ाना शामिल है। यह निर्णय मध्य प्रदेश मॉडल का अनुसरण करता है, जहां निवर्तमान सरपंच अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी प्रशासक के रूप में बने रहते हैं। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और प्रशासनिक समन्वय में सुधार करना है।b
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राजस्थान में सरपंचों का कार्यकाल विस्तार
राजस्थान की 6,759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 17 जनवरी, 2024 को समाप्त होना था। लेकिन, अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण समय पर राजस्थान सरपंच चुनाव संभव नहीं थे। राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए, सरकार ने उनका कार्यकाल बढ़ा दिया। इससे नए चुनाव होने तक शासन में निरंतरता बनी रहेगी।

राजस्थान की ग्राम पंचायतों में सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक प्रशासनिक समिति की स्थापना की गई है। इस समिति में निवर्तमान उप सरपंच और वार्ड पंच शामिल हैं। उनकी भूमिका नीतिगत निर्णयों पर प्रशासक के साथ सहयोग करना और पंचायत बैठकों के दौरान मार्गदर्शन प्रदान करना है। निवर्तमान सरपंच और संबंधित ग्राम विकास अधिकारी इन पंचायतों के बैंक खातों का प्रबंधन करेंगे।
राजस्थान में 'एक राज्य, एक चुनाव' का कार्यान्वयन
सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य विधानसभा और लोकसभा चुनावों के साथ-साथ पंचायतों के लिए चुनाव आयोजित करके 'एक राज्य, एक चुनाव' को लागू करना है। इस रणनीति से वित्तीय और मानव संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह सुनिश्चित करता है कि ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन बिना किसी रुकावट के चलता रहे।
वर्तमान में राजस्थान में 11,000 से ज़्यादा ग्राम पंचायतें हैं। 704 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मार्च में समाप्त हो जाएगा, जबकि 3,847 का कार्यकाल सितंबर और अक्टूबर के बीच समाप्त होगा। इस नई व्यवस्था के तहत सभी पंचायतों में एक साथ चुनाव कराने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति ज़रूरी मानी गई।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक नई पंचायतें नहीं बन जातीं, तब तक मौजूदा पंचायतें सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। इस निर्णय से ग्रामीण विकास गतिविधियों या स्थानीय शासन कार्यों में किसी भी तरह की रुकावट नहीं आएगी। मध्य प्रदेश के इस मॉडल को अपनाकर राजस्थान का लक्ष्य अपनी चुनावी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना और अपने क्षेत्रों में प्रभावी शासन बनाए रखना है।












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