कोटा में छात्रों के सुसाइड पर सीएम अशोक गहलोत ने कोचिंग संचालकों की लगाई क्लास, कही ये अहम बात

Rajasthan CM Ashok Gehlot: इंजीनियर-डॉक्टर बनने का सपन लेकर छात्र-छात्राएं दूर-दूर से कोचिंग लेने के लिए राजस्थान के कोटा आते है। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से कोचिंग सेंटरों में छात्रों द्वारा सुसाइड के मामले लगातार सामने आ रहे है। आत्महत्या के बढ़ते मामलों को लेकर कोटा में हंगामा मचा हुआ है।

छात्रों के सुसाइड के बढ़ते मामले पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को चिंता व्यक्त करते हुए जयपुर में कोचिंग सेंटर के संचालकों के साथ बैठक की। साथ ही, उन्हें फटकार भी लगाई। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सीएम गहलोत ने कोचिंग सेंटरों में सुसाइड की घटनाओं को रोकने के लिए एक कमेटी बनाने का आदेश दिया।

Rajasthan CM Ashok Gehlot

सीएम गहलोत ने कहा कि मैंने एक समिति बनाने की घोषणा की है और यह 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। ऐसा बताया जा रहा है कि इस कमेटी में कोचिंग सेंटरों के संचालक, माता-पिता और डॉक्टर शामिल होंगे। छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामलों पर चर्चा करते हुए सीएम गहलोत ने कहा, 'कोटा में लगभग 18-19 बच्चों ने आत्महत्या कर ली है।'

उन्होंने कहा कि इसलिए छात्रों की समस्याओं को समझना महत्वपूर्ण है। कोचिंग प्रबंधन प्रमुखों को एक बैठक के लिए बुलाया गया है और क्या किया जाना चाहिए इस पर चर्चा की जाएगी। मैं खुद समझने की कोशिश कर रहा हूं कि बच्चों पर ऐसा क्या दवाब आता है कि वे कोचिंग में आने के बाद आत्महत्या कर रहे हैं।

सीएम ने आगे बोलते हुए कहा कि आप नौवीं और दसवीं कक्षा के छात्रों को कोचिंग संस्थानों में दाखिला दिलाकर अपराध कर रहे हैं। यह माता-पिता की भी गलती है। छात्रों पर बोर्ड परीक्षाओं को पास करने और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने का बोझ है...यह सुधार का समय है क्योंकि हम युवा छात्रों को आत्महत्या करते हुए नहीं देख सकते।

एक भी बच्चे की मौत माता-पिता के लिए बहुत बड़ी क्षति है। इस दौरान सीएम गहलोत ने कहा, 'मैं कोटा में बच्चों को अब मरते हुए नहीं देख सकता, सिस्टम सुधारिए अब।' सीएम ने कहा कि कोचिंग संस्थानों में कक्षा 9 और 10 के छात्रों का नामांकन करने से उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

क्योंकि, उन्होंने बोर्ड परीक्षा भी देनी होती है। कहा कि आप 9वीं औऱ 10वीं कक्षा के छात्रों को बुलाते हैं। आप एक तरह से अपराध कर रहे हैं। आजतक की खबर के मुताबिक, सीएम ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि मानों आईआईटी भगवान हो। कोचिंग में आते ही छात्रों का फर्जी स्कूलों में नामांकन करा दिया जाता है। यह माता-पिता की भी गलती है।

कहा कि, छात्रों का डमी स्कूलों में रजिस्ट्रेशन कराया जाता और वे स्कूल नहीं जाते हैं। उन पर बोर्ड परीक्षा पास करने और प्रवेश परीक्षा की तैयारी का दोहरा दबाव होता है। अब सुधार का समय है। हम युवा छात्रों को सुसाइड करते नहीं देख सकते।

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