Rajasthan ByPolls 2024: 'मेघनाथ बनकर मेरे लक्ष्मण जैसे भाई पर शक्ति बाण चला डाला', किरोड़ी ने किसके लिए कहा ऐसा

Rajasthan By-Polls 2024: राजस्थान के सात विधानसभा सीटों के उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर जीत दर्ज की। हालांकि इन चुनावों में सबसे चर्चित सीटों में से एक दौसा विधानसभा सीट भाजपा के हाथ से फिसल गई। यह हार भाजपा नेता किरोड़ी लाल मीणा के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों रूप से गहरा झटका साबित हुई। क्योंकि उनके छोटे भाई जगमोहन मीणा जीत हासिल नहीं कर सके।

45 वर्षों के संघर्ष के बावजूद हार का दर्द

दौसा में हार के बाद किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी गहरी निराशा और व्यक्तिगत पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने अपने 45 वर्षों के लंबे राजनीतिक करियर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह गरीबों, किसानों और मजदूरों के हक के लिए लड़ते रहे हैं। उन्होंने शारीरिक चोटों, जेल जाने और राजनीतिक संघर्षों का सामना किया।

kirodi lal meena

लेकिन इस हार ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुए कहा कि यह हार सिर्फ राजनीतिक नहीं। बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी गहरा दर्द दे गई। मेरे भाई जगमोहन ने हमेशा मेरे हर संघर्ष में साथ दिया और मैं उनके प्रति कर्ज नहीं चुका सका। मेरे दिल में यह दर्द हमेशा रहेगा।

हार की रामायण से तुलना, लक्ष्मण की पीड़ा जैसा दर्द

दौसा में हार को लेकर किरोड़ी लाल मीणा ने महाकाव्य रामायण का संदर्भ देते हुए अपनी स्थिति की तुलना लक्ष्मण के मेघनाथ के बाण से घायल होने से की। उन्होंने कहा कि भीतरघाती मेरे सीने में वाणों की वर्षा कर देते तो मैं दर्द को सीने में दबा सारी बातों को दफन कर देता। लेकिन उन्होंने मेघनाथ बनकर मेरे लक्ष्मण जैसे भाई पर शक्ति का बाण चला डाला।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह हार उन्हें विचलित नहीं करेगी। मैं साढ़े चार दशकों के संघर्ष से न तो निराश हूं और न हताश। हार ने मुझे सबक जरूर सिखाया है। लेकिन मैं गरीबों, किसानों और हर पीड़ित की सेवा के अपने व्रत को कभी नहीं छोड़ सकता।

आंतरिक संघर्षों से मिली हार का मलाल

किरोड़ी लाल मीणा ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह हार बाहरी विरोधियों की वजह से नहीं। बल्कि अपने ही लोगों की वजह से हुई। उन्होंने कहा कि उनकी चापलूसी न करने की आदत और आत्मसम्मान उनकी सबसे बड़ी चुनौती रही। उन्होंने आगे कहा कि यह हार मेरे अपनों की वजह से हुई। जो एक बड़ा दर्द है। मैं चापलूसी नहीं कर सकता, और यही मेरे राजनीतिक सफर में एक बाधा रही है।

दौसा में भाजपा की हार और सचिन पायलट की भूमिका

दौसा की सीट पर भाजपा की हार ने सचिन पायलट के लिए एक बड़ा राजनीतिक प्रतीकात्मक संदेश दिया। इस जीत ने सचिन पायलट की राजनीतिक क्षमताओं को मजबूत किया और भाजपा के प्रमुख नेताओं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, किरोड़ी लाल मीणा और प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल को पराजित कर दिया है।

राजस्थान में भाजपा का प्रदर्शन

भाजपा ने उपचुनावों में कुल सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की है। जिससे पार्टी के राजनीतिक प्रभुत्व को बल मिला। लेकिन दौसा जैसी प्रतिष्ठित सीट गंवाना पार्टी के लिए चिंतन का विषय बन गया है।

दौसा विधानसभा सीट पर हार ने किरोड़ी लाल मीणा के राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। यह हार केवल एक चुनावी परिणाम नहीं था। बल्कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और व्यक्तिगत वफादारी के बीच संतुलन की जटिलता को दर्शाता है।

किरोड़ी लाल मीणा ने हार के बाद भी अपने संघर्ष के रास्ते पर चलने और समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम करते रहने का संकल्प जताया है। दौसा की हार भाजपा के लिए एक सबक है। जबकि किरोड़ी लाल मीणा के लिए यह भविष्य की रणनीतियों को नए सिरे से तैयार करने का अवसर है।

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