कोरोना कहर के बीच राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, सितम्बर तक कोई मेडिकल स्टाफ नहीं होगा रिटायर
जयपुर। राजस्थान में कोविड-19 वायरस कहर बरपा रहा है। दो अप्रैल तक पूरे प्रदेश में 113 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ 24 घंटे अस्पतालों में कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं।

रिटायरमेंट दिवस आगे बढ़ाया जाएगा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोना के कहर के बीच राजस्थान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत सितम्बर तक किसी भी डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ को रिटायरमेंट नहीं दिया जाएगा। इस अवधि के दौरान अगर किसी के रिटायरमेंट का दिवस आता है तो उसे आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही सरकार तत्काल आवश्यकता के आधार पर अस्थायी तौर पर डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन आदि पदों पर स्टाफ भर्ती करेगी। इसके अलावा राज्य सरकार ने हाल ही में लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे करीब 200 डॉक्टर्स को 3 अप्रैल तक वापस ड्यूटी पर लौटने की हिदायत दी है।

1800 पैरामेडिकल स्टाफ सेवा में बना रहेगा
बता दें कि राजस्थान सरकार के मेडिकल कर्मचारियों के एक्सटेंशन के निर्णय से करीब 80-90 डॉक्टर्स और 1800 पैरामेडिकल स्टाफ आगामी 30 सितंबर तक सेवा में बना रहेगा। कोरोना संकट से जूझ रही राजस्थान सरकार की फिलहाल केवल एक ही प्राथमिकता है और वो है लोगों को तत्काल इलाज मिले।

एनएचएम की ओर से पूर्व निर्धारित दरों पर रखेंगे
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह ने बताया कि राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा नियम 1963, राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिनियम 1965 तथा समय-समय पर संशोधित नियमों के तहत डॉक्टर, नर्स और लैब टेक्नीशियन के पदों पर भर्ती होगी। इसमें एमबीबीएस, पीजी डिग्रीधारी, एएनएम, जीएनएम और लैब टेक्नीशियन को कोरोना वायरस के नियंत्रण तक एनएचएम की ओर से पूर्व निर्धारित दरों पर रखा जायेगा।












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