लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूर राजस्थान के जिस स्कूल में ठहरे हैं उसी की कर रहे रंगाई-पुताई, देखें वीडियो

पलसाना (सीकर)। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में 3 मई तक के लिए लॉकडाउन घोषित​ है। मतलब जो व्यक्ति जहां है, वहीं ठहरा हुआ है। लाखों मजदूर दूसरे राज्यों से अपने घर नहीं लौट सके हैं। रास्ते में किसी ना किसी शहर-कस्बे में फंसे हुए हैं। किसी ने स्कूल-कॉलेजों में बनाए गए पलायन सेंटर में डेरा डाल रखा है तो कोई धर्मशालाओं में रुका हुआ है। कहीं सरकार तो कहीं भामाशाहों के सहयोग से इन मजदूरों को भोजन मुहैया करवाया जा रहा है।

लॉकडाउन में ​मजदूरों ने पेश की मिसाल

लॉकडाउन में ​मजदूरों ने पेश की मिसाल

जानिए सरकारी स्कूल में बनाए गए एक ऐसे पलायन सेंटर के बारे में जहां रुके हुए मजदूरों ने लॉकडाउन का समय काटने के लिए अनूठी पहल की है। 'गांव के लोग इतने दिनों से हमारी अच्छी खातिरदारी कर रहे हैं और हमारी काम की आदत छूट गई तो फिर काम भी नहीं होगा...दिनभर खाली बैठने से अच्छा है गांव के लिए कुछ करके जाएं। इसी सोच के साथ मजदूरों ने इस पलायन सेंटर की ही रंगाई-पुताई का काम शुरू कर दिया है।

 पलसाना में ठहरे हुए हैं 54 मजदूर

पलसाना में ठहरे हुए हैं 54 मजदूर

बता दें कि राजस्थान के सीकर जिले के पलसाना के शहीद सीताराम कुमावत व सेठ केएल ताम्बी राउमावि में पलायन सेंटर संचालित है। यहां हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, एमपी, यूपी के 54 मजदूर ठहरे हुए हैं। ये सभी लोग पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और इनका क्वारंटाइन समय भी पूरा हो गया है।

 ठाले बैठे तो बीमार हो जाएंगे

ठाले बैठे तो बीमार हो जाएंगे

सेंटर पर ठहरे मजदूरों ने बताया कि वो मेहनतकश लोग हैं, ठाले बैठे तो बीमार हो जाएंगे। सरपंच और गांव के भामाशाहों ने हमारे लिए बहुत ही अच्छी व्यवस्था कर रखी है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। बदले में गांव के लिए हम भी कुछ करना चाहते हैं। अभी हमें बाहर तो जाने दिया जाएगा नहीं। ऐसे में स्कूल की पुताई शुरू कर दी है।

 सरपंच व विद्यालय स्टाफ ने उपलब्ध करवाई सामग्री

सरपंच व विद्यालय स्टाफ ने उपलब्ध करवाई सामग्री

सरपंच रूपसिंह शेखावत ने बताया कि शुक्रवार को मजदूरों ने उनके सामने मांग रखी कि वे इस पलायन सेंटर स्कूल के साथ अच्छी याद जोड़ना चाहते हैं। इतने दिन तो हम स्कूल की सफाई कर रहे थे, मगर अब रंगाई-पुताई करना चाहते हैं। ऐसे में सामग्री उपलब्ध करवाई जाए। सरपंच व विद्यालय स्टाफ की ओर से सामग्री उपलब्ध कराने के बाद मजूदरों ने विद्यालय में रंगाई पुताई का कार्य शुरू कर दिया।

 स्कूल में ही बना रहे भोजन

स्कूल में ही बना रहे भोजन

प्रधानाचार्य राजेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि स्कूल में मजदूरों से 30 दिन से ज्यादा का समय हो गया। इनके लिए स्कूल में ही भोजन तैयार किया जा रहा है। लॉकडाउन के चलते इन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जा रही है। मजदूरों ने यहां उनके लिए की गई व्यवस्थाओं से खुश होकर ही रंगाई-पुताई का काम करने की ठानी है।

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