हलवाई का परिवार बना खिलाड़ियों की खान, 4 भाई-बहन, भाभी ने देश-विदेश में मचाई धूम
Bharatpur News, भतरपुर। राजस्थान के भरतपुर में नीमदा गेट के पास बाल किशन शर्मा का घर है। यूं तो यह भी आम घरों के जैसा ही है, मगर जो सबसे खास बात है वो ये है कि यह जगह खिलाड़ियों की खान है। यहां नेशनल व इंटरनेशनल लेवल के पांच खिलाड़ी एक साथ रहते हैं। सभी सॉफ्टबॉल के खिलाड़ी हैं। इनमें तीन भाई, एक बहन और एक भाभी शामिल है।

प्रियंका जकार्ता में होने वाले टूर्नामेंट में हिस्सा लेगी
आज हम इस परिवार का जिक्र इसलिए कर रहे हैं कि सबसे छोटी बेटी प्रियंका शर्मा को विदेश में खेलने का मौका मिला है। प्रियंका एक से सात मई के बीच इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में होने वाली सॉफ्ट बॉल टूर्नामेंट में हिस्सा लेगी। 21 अप्रैल को प्रियंका दिल्ली से देशी की अन्य 17 खिलाड़ियों के साथ इंडोनेशिया रवाना होगी।

बड़े भाई लाखन ने की शुरुआत
बाल किशन शर्मा और लाजवंती देवी के 8 बेटा-बेटियों में से चार ने खेल को बतौर कॅरियर चुना। बड़े भाई लाखन शर्मा ने सबसे पहले सॉफ्ट बॉल खेलना शुरू किया। 1997 से 2008 तक कई बार जिला स्तर व नेशनल लेवल पर खेले। इसके बाद दूसरे भाई मनोज शर्मा और सत्येन्द्र शर्मा भी बड़े भाई की राह चल पड़े। इन दोनों ने भी नेशनल लेवल पर कई मैच खेले। अब परिवार की इस परम्परा को बेटी प्रियंका आगे बढ़ा रही है। 2015 से प्रियंका सॉफ्ट बॉल खेल रही है।

सॉफ्टबॉल वाली से ही की लव मैरिज
शर्मा के परिवार में सॉफ्टबॉल के चार खिलाड़ी तो यहीं पर पैदा हुए, मगर पांचवां खिलाड़ी बहू के रूप में मिला। दरअसल, मनोज शर्मा सॉफ्ट बॉल खेला करते थे तब उनकी मुलाकात हनुमानगढ़ सॉफ्ट बॉल खिलाड़ी ऋतु लाडव से हुई। दोनों में पहली नजर में प्यार हुआ और फिर दोनों ने लव मैरिज कर ली। ऋतु 2003-2004 में फिलीपींस की राजधानी मनीला में इंटरनेशल मैच खेल चुकी है।

सॉफ्टबॉल खिलाड़ी बनने के पीछे की कहानी
सत्येन्द्र शर्मा के अनुसार भारत में सॉफ्टबॉल गेम को लाने का श्रेय जोधपुर निवासी दशरथ मल मेहता को जाता है। वे करीब 40-50 साल पहले सभी जिलों में सॉफ्टबॉल खेल को बढ़ावा दे रहे थे। उसी दौरान भरतपुर निवासी श्याम सिंह राजस्थान सरकार में सचिव में हुआ करते थे। उनके प्रयासों से भतरपुर के लोहागढ़ स्टेडियम में सॉफ्टबॉल का प्रशिक्षण दिया जाने लगा था। बड़े भाई लाखन का इस तरफ रुझान हुआ। फिर मनोज शर्मा, सत्येन्द्र शर्मा व प्रियंका शर्मा ने भी सॉफ्टबॉल को चुना।

पिता ने नहीं रोके बढ़ते कदम
जब इनके बेटों ने पढ़-लिखकर नौकरी करने की बजाय खेल को कॅरियर बनाया तब बाल किशन शर्मा हलवाई का करते थे। परिवार में अन्य आय को कोई जरिया नहीं था। आर्थिक तंगी होने के बावजूद बाल किशन शर्मा ने कभी बेटों के बढ़ते कदम नहीं रोके। पहले बेटे और फिर बेटी को जब भी सॉफ्टबॉल की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए जाना होता तो बाल किशन जैसे तैसे करके पैसों को जुगाड़ कर लेते थे।












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