Rajasthan Election: दौसा सीट पर तीसरी बार आमने-सामने होंगे ये प्रत्याशी, अभी तक नहीं पहुंचा कोई स्टार प्रचारक
Dausa Seat Election News: प्रदेश में इन दिनों विधान चुनाव की चर्चा और चमक दोनों चरम पर है। ऐसे में दौसा जिला सबसे चर्चित बना हुआ है, यहां की 5 विधानसभा सीटों (दौसा, लालसोट, महवा, बांदीकुई और सिकराय) पर दोनों ही दलों ने अपना पूरा जोर लगाया हुआ है, लेकिन दौसा सीट सबसे ज्यादा चर्चित बनी हुई है।
हालांकि राजनीतिक रूप से बेहद जागृत और चर्चित दौसा विधानसभा क्षेत्र इन चुनावों मे अभी बड़े नेताओं से अछूता है। वजह चाहे जो रही हो लेकिन यह बात तो माननी पड़ेगी इन विधानसभा चुनाव में दौसा को लेकर काफी असमंजस देखने को मिला है।

कांग्रेस ने किया जल्दी प्रत्याशियों का ऐलान
जहां कांग्रेस ने ऑफिशियली लिस्ट आने से पहले ही जिले के पांचों सीटों के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा सीएम अशोक गहलोत ने अपनी ओर से कर दी थी। वहीं भाजपा अंतिम लिस्ट तक दौसा विधानसभा के लिए ठोस उम्मीदवार तलाशती ही रही।
तीसरी बार विधायक की जंग
ऐसे में अब जबकि दोनों ही दलों की ओर से 2013 और 2018 के चिर परिचित प्रतिद्वंदियों को आमने-सामने लड़ाया गया है, तो बड़े नेताओं की बेरुखी यहां चर्चा का विषय बनी हुई है। विधानसभा आम चुनाव 2023 में एक बार फिर कांग्रेस की तरफ से कृषि विपणन राज्य मंत्री मुरारी लाल मीणा चुनाव लड़ रहे हैं तो भारतीय जनता पार्टी की ओर से वही पुराने उम्मीदवार शंकर लाल शर्मा मैदान में है।
चुनावी गणित की बात करें तो दोनों नेताओं का अपना-अपना वोट बैंक है और अपने-अपने समीकरण हैं। चुनावी प्रचार की बात करें तो दोनों दौसा विधानसभा क्षेत्र में अपने कार्यकर्ताओं के साथ लगातार सक्रिय हैं, वे गांव गांव जा रहे हैं और अपनी बात लोगों के सामने रख रहे हैं।
चुनाव प्रचार का नया तरीका
इस बार के चुनाव में दोनों ही दलों की ओर से जो नई बात देखने को मिली वह यह थी कि चुनाव में जेसीबी के द्वारा फूलों वर्षा हर जगह कराई जा रही है, जहां भी उम्मीदवार पहुंचते हैं तो उनसे पहले जेसीबी पहुंचती है उसे पर कुछ लोग चढ़ते हैं और फिर उन पर फूल वर्षा होती है और वही उसे चुनाव प्रचार कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होता है। अगले दिन सब जगह वही फोटो और वीडियो नजर आते हैं, इसका सबसे बड़ा फायदा यह भी होता है की भीड़ की कमी की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा।
हर बार पलटी दौसा सीट की बाजी
अतीत की बात करें तो 2008 मैं यहां से बसपा के मुरारी लाल मीणा विजय हुए थे, जिन्होंने बाद में कांग्रेस को समर्थन दे दिया था। उसके बाद 2013 में शंकर लाल शर्मा ने बीजेपी से ताल ठोकते हुए कांग्रेस के मुरारी लाल मीणा को चुनाव हराया। फिर 2018 में एक बार फिर यह आमने-सामने थे, लेकिन इस बात परिणाम उलट था यानी मुरारी लाल मीणा कांग्रेस से विजय हुए थे और बीजेपी के शंकर लाल शर्मा बुरी तरह परास्त हुए थे। वो भी लगभग 51000 वोटो से।
अब एक बार फिर तीसरी बार दोनों प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने हैं। दौसा विधानसभा के चुनाव के संदर्भ में यह नई बात है कि दोनों दल लगातार उन्हीं लोगों को टिकट देती आ रही है और वही बार-बार आमने-सामने हो रहे हैं।इस बार के चुनाव के अगर हम बात करें तो अभी तक स्थिति कुछ भी क्लियर नहीं है। हां यह तय है कि जिला स्तर पर अगर हम बात करें तो परिणाम बेहद चौंकाने वाले सामने आ रहे हैं।
बरहाल बड़े नेताओं की दौसा विधानसभा से दूरी इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां अभी तक ना किसी बड़े नेता की सभा हुई है या कोई स्टार प्रचारक यहां तक पहुंचा है। दिल्ली के बीजेपी सांसद मनोज तिवारी की यहां सभा प्रस्तावित थी लेकिन वह भी देर हो जाने की वजह से नहीं हो पाई थी। ऐसे मे अभी तक लोगों को बड़े नेताओं का और स्टार प्रचारकों का इंतजार है।
बड़े नेताओं की हो सकती है सभा
शायद दोनों दलों की ओर से बड़े और स्टार प्रचारकों का आना शायद यहां कुछ स्थिति क्लियर कर सके नहीं तो अभी तक का जो माहौल यहां देखने को मिल रहा है, उसके आधार पर यह कहना बहुत ही मुश्किल होगा कि कौन सा दल बढ़त लिए हुए हैं। मतदाता पूरी तरह खामोश है पर माहौल पर नजर बनाए हुए हैं और वह बिल्कुल भी मुखर नहीं हो रहा। किसी भी बात को लेकर वह सुनता सबकी है लेकिन अपनी ओर से कुछ कहता नहीं है मन की तो बिल्कुल नहीं कह रहा। संभवत: वह वेट एंड वॉच की स्थिति में है। चर्चाओं को अगर आधार माना जाए तो जल्द ही यहां भाजपा की ओर से वसुंधरा राजे की सभा हो सकती है। साथ ही कांग्रेस की ओर से भी बड़े नेताओं के आगमन की सूचना मिल रही है पर फिलहाल सब वोटर "वेट एंड वॉच " की स्थिति में हैं।
संवाद सूत्र: सुनील सत्यवादी, दौसा












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