Ground Report News:कोचिंग सिटी कोटा में लापरवाही की हद,परिवहन विभाग- ट्रैफिक पुलिस की अनदेखी पड़ ना जाए भारी !
Kota Education city Rajasthan News: देश की राजधानी दिल्ली में बेसमेंट में चल रही लाइब्रेरी में पानी भरने के बाद हुए हादसे पर सियासत तो जमकर हुई लेकिन क्या इस हादसे से सरकार और अधिकारियों ने सबक लिया इसी की रियलिटी को जानने और चैक करने के लिए वन इंडिया हिंदी की टीम ने राजस्थान के कोटा के हालात देखे।
राजस्थान का कोटा वो शहर जहां देश का ऐसा कोई राज्य नहीं है जहां से छात्र-छात्राएं कोचिंग करने के लिए नहीं हो। इस शहर में कई ख्यातनाम और ब्राइंडेड संस्थान सालों से स्थापित और संचालित हो रहे है। लेकिन इन कोचिंग संस्थानों के आगे आज भी प्रशासन और प्रशासनिक अधिकारी नतमस्तक ही नजर आ रहे है।
ऐसा इसलिए कह रहे है क्योंकि दिल्ली में तो बेसमेंट में हादसा हुआ कुछ छात्रों की जान ही गई लेकिन कोटा में जिस दिन भी हादसा होगा तस्वीरों और हालातों के बाद ऐसा लगता है कि शायद ही वह यहां के सरकारी सिस्टम से सम्भल पाएं।

कोटा में एक अनुमान के हिसाब के करीब 10 लाख स्टूडेंट विभिन्न कोचिंग संस्थान में अध्ययन कर रहे है। सैकड़ों लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ाई कर रहे है। हॉस्टल से लेकर किराए के कमरें से इन कोचिंग संस्थान और लाइब्रेरी तक जाने के लिए जिस वाहन का छात्र इस्तेमाल कर रहे है या फिर जो वाहन संस्थान की ओर से अधिकृत किया गया है वहीं वाहन इनकी जान का कभी भी दुश्मन बन सकता है।
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वन इंडिया हिंदी की राजस्थान टीम जब कोचिंग संस्थान के बाहर पहुंची और छात्रों के परिवहन की व्यस्थाओं का जायजा लिया तो सामने आया कि कई ऑटों, टैम्पों क्षमता से अधिक और नियम विरूद्ध छात्रों को भरकर नहीं देशी भाषा में कहे तो मवेशियों से बदत्तर ठुंसकर उन्हे उनकी मंजिल तक पहुंचाया जा रहा है।
हमारी टीम ने छात्रों से बात करने की कोशिश की तो वाहन चालक वहां से वाहन सहित भाग खड़ा हुआ। इसके बाद हमने अधिकारियों से बात करने की कोशिश भी की, ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों और परिवहन विभाग के अधिकारियों ने फोन तक उठाने की जहमत नहीं उठाई।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस बेसमेंट में हादसा हुआ क्या बस उसी पैटर्न पर नकेल कसने की कोशिश होगी। क्या ऐसा नहीं होगा कि परिवहन के वाहन, कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी, किराए के मकानों में आग की घटनाएं भी हो जाएं तो उस पर कैसे रोकथाम किए जाएं ? सवाल ढेर सारे है, हादसे की सम्भावनाओं के कई तरीके है जिसका शायद कोई अंदाजा भी नहीं लगा पाएं।
ऐसा भी हो सकता है कि जिस वाहन में क्षमता से अधिक छात्र है उनका वजन वह झेल ही नहीं पाए और तेज रफ्तार पकड़ते ही टायर फट जाए और हादसे में कई नौजवान छात्रों की जान चली जाए। फिलहाल उम्मीद बस इतनी है कि कोटा का प्रशासन और राजस्थान के सरकार इसकों लेकर गम्भीरता से कदम उठाए और एक्शन ले।












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