राजस्थान में यहां मिला सोने का भंडार, रतलाम की फर्म को दिया स्वर्ण खनन का लाइसेंस
राजस्थान में बांसवाड़ा की धरती से जल्द ही सोने निकलेगा। यहां पर 222.39 टन सोने के भंडार मिले हैं, जिनके खनन का लाइसेंस मध्य प्रदेश के रतलाम की सैयद ओवैस अली फर्म को दिया गया है। अब वो दिन दूर नहीं जब राजस्थान देश में कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और झारखंड के बाद चौथा सर्वाधिक स्वर्ण खनन वाला राज्य बन जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट में खनिज अभियंता गौरव मीणा के हवाले से लिखा गया है कि बांसवाड़ा जिले में भूकिया-जगपुरा व कांकरिया दो ब्लॉक खदान के लिए आवंटित किए गए हैं। भुखिया-जगपुरा स्वर्ण ब्लॉक के माइनिंग लाइसेंस रतलाम की फर्म को दिया गया है जबकि दूसरे ब्लॉक कांकरिया गारा गोल्ड के कंपोजिट लाइसेंस के लिए 5 कंपनियां आई हैं, जिनमें अहमदाबाद की हीराकुंड नेचुरल रिसोर्सेस लिमिटेड, मुंबई की पोद्दार डायमंड प्राइवेट लिमिटेड, रतलाम की ओवैस मेटल एंड मिनरल्स प्रोसेसिंग लिमिटेड, उदयपुर की हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और कानपुर की जेके सीमेंट लिमिटेड शामिल हैं।
बता दें कि भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक इस क्षेत्र में 940.26 हैक्टेयर क्षेत्रफल में 113.52 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क का आरंभिक आकलन किया गया है। जिसमें सोने के धातु की मात्रा 222.39 टन आंकी गई है। वहीं कांकरिया गारा में 205 हैक्टेयर में 1.24 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क संभावित है।
बांसवाड़ा में सोने की इन खदानों से सोने के साथ अन्य सह खनिज भी निकलेंगे। बांसवाड़ा जिले में स्वर्ण खनन से इलेक्ट्रॉनिक, पेट्रोलियम, पैट्रोकैमिकल्स, बैटरी, एयर बैग सहित कई उद्योगों में नए निवेश के साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अप्रत्याशित अवसर विकसित होने की संभावना है।












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