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Rajasthan News: पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का क्यूं छलका सियासी दर्द, कहा- वो वफ़ादारी का दौर था ?

Politics of Rajasthan: राजस्थान की सियासत में भाजपा की सिरमौर माने जाने वाली पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को विधानसभा चुनावों से लेकर लोकसभा चुनावों में अनदेखी कर किनारे करने का दर्ज आज छलक पड़ा।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने दौर को याद करते हुए कहा कि वो दौर वफा का था लेकिन अब यह दौर जिसे अंगुली पकड़ कर चलाना सिखाते है वहीं अंगुली को काटता है।

राजे के इस बयान के बाद राजस्थान से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में इस बयान की जबरदस्त चर्चाएं हो रही है। राजे गुट के कई नेता अब समर्थन में भी उतर आए है।

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राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के ताजा बयान राजस्थान भाजपा की सियासत में राजे गुट के फिर से सक्रिय होने की आख़िरी हसरतों की ओर इशारा कर रहा है।

राजस्थान में भले ही वसुंधरा राजे का दौर ख़त्म मान लिया गया हो, लेकिन राजनीतिक तौर पर अपनी सियासी जमीन को हासिल करने की उनकी जद्दोजहद जारी है।

हाल ही में एक समारोह में दिये गये उनके ताज़ा बयान कई ओर इशारा कर रहे हैं। लेकिन यह साफ तौर पर को भाजपा आलाकमान पर उनकी अनदेखी पर कसे तंज़ माना जा रहा है।

दूसरी ओर वसुंधरा राजे के इस बयान से जहां कांग्रेस को भाजपा की गुटबाज़ी पर हमला करने का मौका मिल गया। वहीं भाजपा में भी कई नेताओं के स्वर वसुंधरा राजे के समर्थन में सुनाई देने लगे हैं।

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के ताजा बयान राजस्थान भाजपा की सियासत में राजे गुट के फिर से सक्रिय होने की आख़िरी हसरतों की ओर इशारा कर रहा है।

इस बयान में दो बार की सीएम रहीं वसुंधरा राजे के राजस्थान भाजपा की मौजूदा सियासत पर ना केवल तंज है बल्कि एक पार्टी के रूप में भाजपा को बनाने में परिवार के योगदान और ख़ुद की अनदेखी का दर्द भी छिपा है।

वसुंधरा राजे ने लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद पहली बार सियासी तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि के अवसर पर उदयपुर में वसुंधरा राजे ने बड़ा बयान दिया।

राजे ने कहा कि सुंदर सिंह भंडारी जैसे नेताओं ने राजस्थान में भैरों सिंह सहित कितने ही नेताओं को आगे बढ़ाया था, पर वफा का वह दौर अलग था तब लोग किसी के किए हुए को मानते थे। लेकिन आज तो लोग उसी उंगली को पहले काटने का प्रयास करते हैं, जिसको पकड़ कर वह चलना सीखते हैं।

यहां वसुंधरा राजे संघ के साथ अपने परिवार के रिश्तों और भाजपा को बनाने में योगदान का हवाला देने से भी नहीं चुकी। राजे ने कहा कि उनकी मां ने हमेशा संघ के संस्कार दिए। मेरी माता ने पहली जनसंघ की सरकार बनाई थी।

राजे ने कहा कि उनकी माता विजयाराजे सिंधिया ने एमपी में 1967 में देश में पहली बार जनसंघ की सरकार बनाई। गोविंद नारायण सिंह को सीएम बनाया तब भंडारी जी ने पत्र लिख कर खुशी जताई थी।

मां ने बचपन से ही हमें संघ के संस्कार दिए हमारे घर में तो कई बार संघ की शाखा लगती थी। अटल जी, आडवाणी जी, राजमाता साहब, भैरों सिंह जी, सुंदर सिंह जी भंडारी, रज्जू भैया, केएस सुदर्शन जी, दत्तोपंत ठेंगड़ी जी और कुशाभाऊ ठाकरे जी जैसे देशभक्तों का मार्गदर्शन हमें मिला।

दरअसल राजस्थान की भाजपा की राजनीति में जिस तरह से पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में वसुंधरा राजे की अनदेखी की गई है। राजे का ये बयान उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

हालांकि लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली 11 सीटों पर हार के बाद अब कई नेताओं के स्वर राजे के समर्थन में भी सुनाई देने लगे हैं।

सीकर लोकसभा सीट से दो बार के सांसद और इस बार चुनाव हारने वाले सुमेधानंद सरस्वती ने कहा है कि वसुंधरा राजे में चुनाव में सक्रिय रहतीं तो परिणाम दूसरा हो सकता था।

वैसे देखा जाये तो राजस्थान कांग्रेस ने पहले से लोकसभा चुनाव में राजे को साइड लाइन करने को मुद्दा बनाया था। अब उन्हें फिर से राजस्थान भाजपा की गुटबाज़ी पर सियासी हमला बोलने का मौक़ा मिल गया है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनते ही राजस्थान भाजपा वसुंधरा युग से आगे बढ़ गई है। लेकिन ये भी सच है कि राजे की अपनी खोई हुई सियासी ज़मीन ना सही लेकिन सम्मानजनक जगह पाने की जद्दोजहद जारी रहेगी। यह सियासी जंग आने वाले दिनों में तेज भी हो सकती है।

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