अंधविश्वास : पूरा दिन जंगल में हवन पूजन करने से खत्म होगा कोरोना, ग्रामीणों का दावा
झालावाड़, 30 अप्रैल। तस्वीर में दिख रहा ये हवन किसी घर परिवार में सुख शांति के लिए नहीं किया जा रहा है। बल्कि ये हवन कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए किया जा रहा है।अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें अलग क्या है। तो चलिए अब हम आपको बताते हैं कि इसमें क्या और कितना अलग है।

दरअसल, राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग इलाके के ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना से बचाव के लिए ग्रामीण अब उपचार के अलावा दूसरे कई अनोखे उपाय कर कोरोना को भगाने का जतन कर रहे हैं। ग्रामीणों में कोरोना का खौफ इस तरह घर कर गया हैं कि अलग-अलग गांवों के ग्रामीण पूरा गांव खाली कर बाहर जंगल में रहते हैं। आपदा के इस समय में पुरानी मान्यताओं का हवाला देकर उनको उम्मीद है कि वे सभी इस महामारी से जंगल में सुरक्षित रह सकेंगे।
ग्रामीणों के अनुसार मान्यता है कि सभी को पूरा दिन जंगल में ही रहकर खाना बनाकर खाना होता है।
रात में ही ग्रामीण वापस अपने घरों को लौटते हैं।इससे पहले दिन में किसी को भी गांव में आने और जाने की इजाजत नहीं है। आपको बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में झालावाड़ जिला भी लगातार संक्रमण की चपेट में है।
रोजाना कई कोरोना पीड़ित इस महामारी के कारण अकाल मौत के शिकार हो रहे हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में लोग दहशत में हैं। ये ग्रामीण जंगल में दिनभर हवन, यज्ञ और पूजा अभिषेक के कार्यक्रम करते हैं। ये ग्रामीण सूर्योदय से पहले गांव से जंगल के लिए निकल जाते हैं और सूर्यास्त के बाद वापस लौटते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यह तरीके अपनाने के लिए उन्हें 'माताजी' के द्वारा निर्देश दिए गए है।
इन सभी आयोजन के दौरान ना तो गांव में किसी को आने की इजाजत होती है और ना ही किसी को जाने की। इसके लिए खास तौर पर गांव के युवा लोग गांव की सीमा के बाहर लाठियों के साथ पहरेदारी करते हैं। कोरोना काल में गांव के बाहर मंदिरों में भी हवन और यज्ञ कर वैदिक मंत्रोचार के बीच आहुतियां दी जा रही है। गांव की महिलाएं जंगल में खाना बनाती है. जंगल में भजन कीर्तन कर कोरोना को भगाने की प्रार्थना की जा रही है।












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