Rajasthan: गूगल और यूट्यूब से 23 साल की उम्र में डिजिटल दुनिया में बनाया ब्रांड, अब युवाओं को दे रहे प्रेरणा
Rajasthan News: बीकानेर के युवा उद्यमी मेहुल पुरोहित ने महज 23 साल की उम्र में डिजिटल ब्रांडिंग के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। 8 फरवरी 2001 को जन्मे मेहुल का सफर संघर्षों और प्रेरणाओं से भरा रहा। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाते हुए सफलता की बुलंदियों को छुआ है।
परिवार और शिक्षा का सफर
2010 में पिता कीर्ति कुमार पुरोहित के निधन के बाद मेहुल के परिवार को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनकी मां मधु पुरोहित ने परिवार को संभालने के लिए ब्यूटी पार्लर चलाया। उनकी मां का संघर्ष और समर्पण मेहुल की सबसे बड़ी प्रेरणा बना।

मेहुल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रमेश इंग्लिश स्कूल और प्लैनेट ऑफ कॉमर्स से पूरी की। 2021-23 के बीच उन्होंने महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। हालांकि मेहुल का मानना है कि उनकी असली शिक्षा गूगल और यूट्यूब से मिली। जहां उन्होंने 11वीं कक्षा के दौरान ग्राफिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में कदम रखा।
मल्टीफेज डिजिटल की स्थापना
साल 2021 में मेहुल ने अपनी कंपनी मल्टीफेज डिजिटल की शुरुआत की। यह कंपनी तेजी से बॉलीवुड हस्तियों के बीच लोकप्रिय हुई और डिजिटल ब्रांडिंग के क्षेत्र में अपनी एक खास जगह बनाई। उनकी सफलता में उनके भाई देवेंद्र पुरोहित का महत्वपूर्ण योगदान रहा। जिन्होंने हमेशा उनका समर्थन किया और कंपनी की रीढ़ के रूप में काम किया।
सम्मान और उपलब्धियां
मेहुल की कड़ी मेहनत और अद्वितीय सोच ने उन्हें कई बड़े सम्मानों का हकदार बनाया। 2022 में उन्हें एशिया के सबसे युवा उद्यमी का खिताब दिया गया। उन्हें इकोनॉमिक टाइम्स यंग इंडस्ट्री लीडर्स अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। जो उन्हें मशहूर अभिनेता सोनू सूद द्वारा प्रदान किया गया।
जुनून और दृढ़ता का प्रतीक
मेहुल का जीवन दर्शन जुनून और दृढ़ता के इर्द-गिर्द घूमता है। उनका मानना है कि सीखने और मेहनत करने की इच्छा के साथ कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी सफलता की कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। जो उन्हें अपने सपनों का पीछा करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
भविष्य का लक्ष्य
मेहुल का सपना अपनी कंपनी मल्टीफेज डिजिटल को वैश्विक स्तर पर डिजिटल ब्रांडिंग के क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंचाना है। उनकी सफलता साबित करती है कि छोटे शहरों के युवा भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
मेहुल पुरोहित की यात्रा संघर्ष, समर्पण और सफलता की अद्वितीय मिसाल है। उनकी कहानी न केवल युवाओं को प्रेरित करती है। बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे संकल्प और मेहनत से हर सपना साकार हो सकता है। मेहुल ने साबित कर दिया है कि किसी भी चुनौती का सामना कर विश्व मंच पर अपनी छाप छोड़ी जा सकती है।












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