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Students! 'जिंदगी अनमोल है', कोटा में डिनर पर गपशप कर समझा रहे IAS डॉ.रविंद्र गोस्वामी

Rajasthan News: राजस्थान के कोटा में बढ़ती विद्यार्थियों के आत्महत्या के मामले में कमी लाने और विद्यार्थियों में नई जान फूंकने के लिए कलेक्टर डॉ.रविंद्र गोस्वामी ने नवाचार शुरू किया है।

कोटा कलेक्टर डॉक्टर रविंद्र गोस्वामी ने नवाचार करते हुए कोचिंग छात्र-छात्राओं को सफलता के मंत्र देने के लिए "कामयाब कोटा" अभियान शुरू किया है।

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जिला कलेक्टर डॉक्टर रविद्र गोस्वामी ने कोचिंग विद्यार्थियों के बीच जाकर डिनर कर उन्हे सफलताओं के मंत्र दे रहे है। इसकी शुरूआत करते ही सार्थक परिणाम भी आने लगे है।

जिला कलेक्टर गोस्वामी के "कामयाब कोटा" अभियान के तहत प्रशासन ने कोचिंग स्टूडेंट्स को टेंशन से बाहर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत कोटा जिला कलेक्टर ने हॉस्टल में विद्यार्थियों के साथ डिनर किया।

कामयाब कोटा अभियान के तहत जिला प्रशासन ने कोचिंग स्टूडेंट्स को टेंशन से बाहर लाने, उनके मनोरंजन, उनकी समस्याओं का समाधान और उन्हें एक खुशनुमा माहौल देने के लिए कई प्रयास किए हैं।

इन्हीं प्रयासों के तहत कोटा जिला कलेक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी ने कोचिंग एरिया लैंडमार्क सिटी कुन्हाड़ी में स्थित एक हॉस्टल में विद्यार्थियों के साथ डिनर करते हुए बातचीत के साथ हंसी-मजाक भी किया।

कलेक्टर ने बच्चों की समस्याओं को जाना, उनकी बात सुनी, उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। साथ ही उनके साथ हंसी मजाक करके उनकी टेंशन कम करने का प्रयास किया।

जिला कलेक्टर कोटा ने स्टूडेंट्स को भागवत गीता की सीख के माध्य्म से संयमित रहने का तरीका भी समझाया, डिनर करते हुए एक छात्र ने कलेक्टर से कहा कि उसे पढ़ाई के बाद भी आत्मविश्वास न आ पाना और स्वयं की तैयारी पर हमेशा शंका रहती है।

इस पर कलेक्टर ने जवाब में कहा कि तैयारियों पर शंका होना सामान्य है. इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं है.

कोटा जिला कलेक्टर डॉक्टर गोस्वामी ने कहा कि आप भावी डॉक्टर्स है, स्वयं की कमियों को पहचाने और मोबाइल से दूर रहें।

पढ़ाई को याद रखने के प्रश्न पर कलेक्टर ने जवाब दिया कि लिख-लिख कर पढ़ाई करें, पढ़ाई को डायग्राम बना कर याद रखने की विभिन्न ट्रिक्स के माध्यम से स्मार्ट स्ट्रेटेजी बनाकर याद करें।

एग्जाम में होने वाली सिली मिस्टेक्स से कैसे बचें, छात्रों के इस प्रश्न के जवाब में कलेक्टर ने कहा कि परीक्षा में सिली मिस्टेक्स करना सामान्य है, जो सब करते हैं।

लेकिन कुछ लोग ज्यादा करते हैं, तो कुछ कम, ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करना, रिविजन करना और पुरानी गलतियों को न दोहराने की इच्छा से सिली मिस्टेक्स से बचा जा सकता है।

जिला कलेक्टर गोस्वामी ने कहा कि सभी विद्यार्थियों की अपनी क्षमता है, लेकिन जो टॉपिक आपको मुश्किल लगता है उसके टेस्ट जरूर दें, ताकि गलतियों से सीखा जा सके।

कलेक्टर ने कहा कि उन्होंने एमबीबीएस के बाद आईएएस बनने का निर्णय किया, उन्होने कहा कि ग्रेजुएशन जीवन का एक पड़ाव है, यह मंजिल नहीं है।

जीवन मे हमेशा कुछ बेहतर करने की और पाने की गुंजाइश है, कलेक्टर ने कहा कि रात में सोने से पहले दिन में किए काम और पढ़ाई का आत्ममंथन करें। अगर लगता है आज किसी चीज में ज्यादा समय बर्बाद किया है, तो कोशिश करें अगले दिन वह गलती न दोहराएं।

अच्छे नंबर आने और सिलेक्शन से तनाव के प्रश्न पर कलेक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी ने कहा कि पीयर प्रेशर होना सामान्य है, लेकिन हर छात्र की अपनी क्षमता और खूबियां होती हैं, इसलिए तुलना से बचना चाहिए>

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि परिश्रम और पुरषार्थ में विश्वास रखें, मन लगाकर मेहनत करें, मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

कलेक्टर ने छात्रों के साथ विद्यार्थी जीवन के अपने अनुभव बांटे, विद्यार्थियों ने भी बड़ी शांति के साथ सुना, जिला कलेक्टर के साथ डिनर कार्यक्रम की छात्रों ने सराहना की।

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