Rajasthan: सीएम भजन लाल शर्मा की फिर फिसली जुबान, कहा-'किसी का बाप भी आ जाए तो नहीं हट सकती धारा 370'
Rajasthan By-Polls: राजस्थान के सात विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। टोंक जिले की देवली-उनियारा सीट पर भाजपा उम्मीदवार राजेंद्र गुर्जर के समर्थन में प्रचार करते हुए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का बयान विवाद का कारण बन गया। मुख्यमंत्री ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के कांग्रेस के विरोध की आलोचना करते हुए अनजाने में यह कह दिया कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 नहीं हटाया जा सकता। जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और विवाद ने जोर पकड़ लिया।
मुख्यमंत्री शर्मा ने जनसभा में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए अनुच्छेद 370 पर गलत तथ्य प्रस्तुत किया। जिससे राजनीतिक माहौल गर्मा गया। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना संभव नहीं। हालांकि केंद्र सरकार ने इसे पहले ही हटा दिया है। इस बयान ने कांग्रेस और भाजपा के समर्थकों के बीच तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी।

भाजपा की उपलब्धियों पर जोर
सीएम शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए राम मंदिर निर्माण का जिक्र किया और इसे भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक सिद्धांतों के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया। उन्होंने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार की जननी होने का आरोप लगाते हुए उसके नेताओं पर विभाजनकारी और घृणास्पद भाषा का समर्थन करने का आरोप भी लगाया।
राजस्थान में झुंझुनू, दौसा, देवली-उनियारा, खींवसर, चौरासी, सलूम्बर और रामगढ़ सीटों के लिए 13 नवंबर को उपचुनाव होंगे और मतगणना 23 नवंबर को होगी। ये उपचुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं। बल्कि राज्य के राजनीतिक माहौल में संभावित बदलाव का संकेत माने जा रहे हैं।
कन्हैया लाल की घटना का जिक्र
सीएम शर्मा ने राज्य में कन्हैया लाल की हत्या की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस पर इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे कांग्रेस की जनता के प्रति असंवेदनशीलता और सुरक्षा को लेकर लापरवाही के उदाहरण के रूप में पेश किया।
इन उपचुनावों में भाजपा और कांग्रेस की रणनीतियां और विवादास्पद मुद्दे मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण चुनावी परीक्षा साबित होंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाताओं पर इन बयानों का क्या असर होता है और राजस्थान का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ता है।












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