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भारत-पाक बॉर्डर पर 50 डिग्री तापमान से बीएसएफ जवानों की 'जंग', ऐसे बच रहे गर्मी से, देखें VIDEO


Jaisalmer News in Hindi, जैसलमेर। राजस्थान भीषण गर्मी की चपेट में है। पूरा सूबा तप रहा है। सड़कों पर डामर पिघल रही है। आसमां से अंगारे बरस रहे हैं और तापमापी का पारा 50 डिग्री के करीब चला गया है। 2019 के सीजन में 31 मई सबसे गर्म दिन रहा है।

BSF jawan patrolling in 50 degree temperature on Indo-Pak border in Jaisalmer

एक तरफ पूरे राजस्थान में सुबह से ही कोना-कोना भट्टी की मानिंद गर्म हो रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत-पाक सीमा पर तैनात जवान बुलंद हौसलों से मौसम को मात दे रहे हैं, जो किसी 'जंग' से कम नहीं। भारत-पाकिस्तान अन्तरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा में तैनात भारतीय सीमा सुरक्षा बल के जवानों का हौसला देखते बन रहा है।

यूं तो शुक्रवार को जैसलमेर शहर में तापमान 46.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है, मगर जिले के सीमावर्ती इलाकों में तापमान 50 डिग्री को छू चुका है। 3 जून 1991 को जैसलमेर में अधिकतम तापमान 49.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। वर्ष 2019 में नौपता के प्रभाव को देखते हुए 28 साल पुराना यह रिकॉर्ड टूट सकता है।

BSF jawan patrolling in 50 degree temperature on Indo-Pak border in Jaisalmer

डीआईजी (जी) एमएस राठौड़ जोधपुर ने बताया कि हमारे जवान 50 डिग्री तापमान में भी बॉर्डर पर मुस्तेदी से डटे हुए हैं। जवानों के लिए दिन में तीन बार निम्बू पानी की व्यवस्था की गई है। उसके अलावा खाने में प्याज तथा छाछ-राबड़ी व ग्लूकोन डी वगैरह कई तरीके के इंतजाम किए जा रहे हैं। बीएसएफ की तरफ से पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है, जिससे जवानों को मरुस्थल में ज्यादा पैदल न चलना पड़े।

उपकरण हो रहे काले, मतलब 50 डिग्री तापमान

सीमा सुरक्षा बल के पास तापमान बताने वाले जो उपकरण हैं, वे 50 डिग्री तक ही तापमान बता पाते हैं। उससे अधिक तापमान होने पर उपकरण काले पड़ जाते हैं। बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार फिलहाल यही स्थिति है। पिछले कई दिनों से सीमा चौकियों पर लगे उपकरण काले हो रहे हैं। मतलब साफ है कि पारा 50 डिग्री को पार कर गया है। इतना ही नहीं बीएसएफ के जवान बॉर्डर पर तापमान बताने वाली घड़ियां भी लेकर बैठे हैं, जिसमें पिछले कुछ दिनों से पारा 50 से 52 डिग्री तक पहुंच रहा है।

लू से बचने के लिए मुंह पर कपड़ा

बॉर्डर पर तैनात जवान भीषण गर्मी और लू की चपेट में आने से बचने के लिए परम्परागत तरीके अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। छाछ-राबड़ी, नीबू पानी आदि लेने के साथ-साथ मुंह पर कपड़ा भी बांधकर रखते हैं। जवानों में न केवल पुरुष बल्कि म​हिला जवान भी शामिल हैं।

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