मिसाल : 6 साल की उम्र में करंट लगने पर हाथ कटे, अब पैरों से लिखकर अफसर बन गया भरत सिंह शेखावत
सीकर। कहते हैं इंसान की तकदीर हाथों की लकीरों में होती है, मगर इस मामले में भरत सिंह शेखावत की कहानी सबसे जुदा है। भरत के दोनों हाथ नहीं हैं। किस्मत के भरोसे बैठे रहने की बजाय भरत ने अपने दोनों से खुद तकदीर बदली है। कभी बिना हाथों के लाचार सा लगना वाला भरत आज अफसर है। हर कोई इसकी जिंदगी की मिसाल दे रहा है।

सीकर का रहने वाला है भरत सिंह शेखावत
बता दें कि भरत सिंह शेखावत राजस्थान के सीकर का रहने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भरत का हाल ही कृषि पर्यवेक्षक पद पर चयन हुआ है। अपने पहले ही प्रयास में भरत ने यह कामयाबी हासिल की है। कृषि पर्यवेक्षक की परीक्षा भरत ने पैरों से लिखकर दी है।

छह साल की उम्र में कटे हाथ
भरत सिंह शेखावत जब छह साल के थे तब हाइटेंशन लाइन की चपेट में आ गए थे। भरत की जिंदगी तो बच गई थी, मगर इन्हें अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े। कंधे के पास से दोनों हाथ कट जाने के बाद भरत ने बिस्तर पकड़ लिया था। दो साल तक बिस्तर पर ही रहा।

दोस्तों को देखकर ठाना स्कूल जाना
हाथ कटने के बाद भरत बिस्तर पर ही लेटा रहता था और उसके सभी साथी बच्चे स्कूल जाने लगे थे। भरत भी परिजनों से जिद करता था कि उसे भी स्कूल भेजा जाए। दिनोंदिन भरत का हौसला बढ़ता ही जा रहा था। मेहनत और लगन का नतीजा यह रहा कि पैरों से लिखकर भरत ने आठवीं बोर्ड परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त किया।

आरएससीआईटी का कोर्स भी किया
आजकल प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने के लिए कम्प्यूटर का कोर्स भी अनिवार्य है। ऐसे में भरत ने पैरों से ही कम्प्यूटर चलाना सीखा और 85 फीसदी अंक के साथ आरएससीआईटी का डिप्लोमा भी किया। भरत मोबाइल भी अपने पैरों से ही चला लेता है।

एग्री क्लासेज के निदेशक ने करवाई तैयारी
बता दें कि शिक्षा पूरी करने के बाद भरत ने कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी। भरत की हिम्मत और हौसला देखकर राजस्थान एग्री क्लासेज के निदेशक राम नारायण ने तीन साल तक भरत को निशुल्क तैयारी करवाई। शुक्रवार को कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी हुआ तो भरत का नाम भी सफल उम्मीदवारों की सूची में शामिल था।












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