पति को मौत के मुंह से निकाल लाई पत्नी, चंद्रा देवी ने यूं बचाया अपना 'चांद'
पति को मौत के मुंह से निकाल लाई पत्नी, चंद्रा ने यूं नहीं डूबने दिया अपना 'चांद'
बाड़मेर। बीते सप्ताह ही महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। यह तो सिर्फ एक दिन का पर्व था, मगर महिलाएं सालभर अपने सुहाग की सलामती के लिए दुआएं करती नजर आती हैं। जब भी पति की जिंदगी जोखिम में पड़ती है तो पत्नी अपनी जान दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हटती है। ऐसी कहानी राजस्थान के बाड़मेर जिले के बोला गांव की चंद्रा देवी है, जिसने अपने 'चांद' को डूबने से बचा लिया।

बाड़मेर के गांव बोला में राशन डीलर चतराराम और उनकी पत्नी चंद्रा देवी की जिंदगी में वर्ष 2008 तक सब कुछ ठीक चल रहा था। घर का कोना-कोना खुशियों से सराबोर था, मगर अचानक चतराराम की तबीयत नासाज हो गई। उन्होंने खाट पकड़ ली। परिजन उनको इलाज करवाने गुजरात ले गए। अहमदबाद के एक अस्पताल में जांच के दौरान पता चला चतराराम की दोनों किडनी फेल हो गई। इसके बाद डायलिसिस पर आ गए और किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ी। जब यह बात पत्नी चंद्रा देवी को पता चली तो वह तुरंत तैयार हो और पति को अपनी एक किडनी दे दी।
दोनों एक-एक किडनी पर जी रहे
चंद्रा देवी के इस फैसले से उसके पति मौत के मुंंह से बाहर निकल पाए। वर्तमान में पिछले करीब 11 साल दोनों पति पत्नी एक-एक किडनी पर जी रहे हैं। दोनों के एक लड़का है। चतराराम कहते हैं कि पत्नी खुद की जिंदगी दांव पर लगाकर किडनी दान नहीं करती तो शायद ही जिंदा बच पाता।












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