MP राजकुमार रोत का राजपरिवार के समरोह में भील समुदाय की उपेक्षा का आरोप, कहा-'मेवाड़ के इतिहास को किया शर्मसार'
Rajasthan News: राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट से भारतीय आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर मेवाड़ राजपरिवार के राज्याभिषेक समारोह से भील समुदाय की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।
सांसद राजकुमार रोत ने मेवाड़ के इतिहास में भील समुदाय के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध और अन्य ऐतिहासिक संघर्षों में भीलों की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने इस संदर्भ में उदयपुर सिटी पैलेस के बाहर हुई झड़पों का एक वीडियो साझा करते हुए इसे मेवाड़ के इतिहास को शर्मसार करने वाला और हल्दीघाटी के शहीदों का अपमान करार दिया है।
विश्वराज सिंह के राज्याभिषेक के बाद उपजा विवाद
यह विवाद भाजपा विधायक विश्वराज सिंह के राज्याभिषेक के बाद उपजा है। चित्तौड़गढ़ किले में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्हें मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के मुखिया के रूप में औपचारिक रूप से स्थापित किया गया। इस समारोह में पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ तलवार से रक्त तिलक कर राज्याभिषेक किया गया।
हालांकि इस आयोजन को मेवाड़ राजपरिवार के भीतर चल रहे पारिवारिक विवाद ने प्रभावित किया। महेंद्र सिंह मेवाड़ के छोटे भाई अरविंद सिंह मेवाड़ ने कानूनी नोटिस भेजकर सिटी पैलेस में प्रवेश पर रोक लगा दी। जिसके कारण समारोह के बाद तनाव बढ़ गया।
विश्वराज सिंह ने चित्तौड़गढ़ से लौटने के बाद एकलिंगनाथ महादेव मंदिर में दर्शन करने का प्रयास किया। जो मेवाड़ के शासकों की एक परंपरा रही है। लेकिन उदयपुर सिटी पैलेस के बाहर घंटों इंतजार के बावजूद उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच झड़प हुई। जिसमें पत्थरबाजी से तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।

भील समुदाय की अनदेखी पर रोत का विरोध
सांसद राजकुमार रोत ने इस कार्यक्रम में भील समुदाय को शामिल न किए जाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास में भील समुदाय ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अपमान करार देते हुए आयोजकों पर सवाल उठाए।
हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने रोत पर राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उछालने का आरोप लगाया। कई लोगों ने यह भी कहा कि समारोह में राणा पूंजा सोलंकी के वंशजों की उपस्थिति यह साबित करती है कि किसी समुदाय को अपमानित करने का कोई इरादा नहीं था।
राजपरिवार के विवाद और झड़प का प्रभाव
सिटी पैलेस में हुई झड़प ने न केवल राजपरिवार के भीतर की दरार को उजागर किया है। बल्कि समकालीन समाज में राजशाही परंपराओं की प्रासंगिकता पर बहस छेड़ दी है।
इस घटना ने मेवाड़ की सांस्कृतिक परंपराओं में भील समुदाय और अन्य वंचित वर्गों की भागीदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। आलोचकों का कहना है कि एक समावेशी नजरिया अपनाने से न केवल मेवाड़ की ऐतिहासिक धरोहर संरक्षित होगी। बल्कि यह आधुनिक समाज के समानता के सिद्धांतों के भी अनुरूप होगा।
विश्वराज सिंह के राज्याभिषेक समारोह और उसके बाद हुई झड़प ने मेवाड़ की परंपराओं, सामुदायिक अधिकारों और समकालीन लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक गहन बहस को जन्म दिया है। यह घटना ऐतिहासिक रीति-रिवाजों और समतावादी समाज के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को रेखांकित करती है।












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