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17वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 में किताबों,साहित्य के साथ भी संघर्षों का एक अलग बाजार,देखिए पूरी खबर

17th Jaipur Literature Festival 2024: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में ऐसा नहीं है कि साहित्यकारों का ही महाकुम्भ है। यहां लोकल ब्रांड, कला-कलाकारों के सपने से सजा अलग बाजार भी है।

छोटे व्यवसायी अपने क्षेत्रों के शिल्प-हस्त कलाओं और उनसे जुड़ी कहानियों को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने आए शिल्पकारों से चर्चा कर उनकी संघर्ष और सफलता का राह जानी।

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पांच दिवसीय जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 का 17वां संस्करण राजस्थान के गुलाबी शहर यानी जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में चल रहा है।

यह फेस्टिवल पूरी तरह से संस्कृति, पुरानी यादों और पुरानी कलाओं से सजा हुआ है। देश,प्रदेश के कई छोटे व्यवसायी अपने क्षेत्रों के शिल्प-हस्त कलाओं और उनसे जुड़ी कहानियों को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने आए हैं।

इस फेस्टिवल में कुछ लोगों से हमने बात की और जानने की कोशिश की इन शिल्पकारों की कहानी और उनकी कलाकृति के बारे में ।

जयपुर की 26 वर्षीय आयुषी जैन ने इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए ट्रेनिंग लिया था लेकिन प्रोफेशनल परेशानियों की वजह से उनका सपना पीछे रह गया। साल 2020 में जब कोविड महामारी आई, तब आयुषी अपने पैशन और प्यारशिल्प (क्राफ्ट)की ओर वापस लौट आईं।

वह डायरियों को नया रूप देते थी, चीजों पर हाथ से पेंट करती थी और आर्ट बनाती थी। फिर अपने पिता के थोड़े से दबाव के बाद, उन्होंने अपना खुद का स्टोर "वर्नान" शुरू किया। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के बाजार में उन्होंने अपनी प्रदर्शनी लगाई।

इस दौरान जैन ने बताया कि "हम न केवल मेरे द्वारा बनाए गए उत्पादों का प्रदर्शन करते हैं। ताकि उन्हें अपनी बनाए हुए आर्ट को बेचने के लिए जगह मिल सके। बिजनेस और क्रिएटीविटी के साथ- साथ हमारे कारीगरों को ट्रेनिंग देने की कोशिश में अब तक की यात्रा कठिन रही है, लेकिन यह सुखद भी रही है।

बेंगलुरु के फ्लोरिश के 32 वर्षीय संस्थापक साविक भी आयुषी जैन की तरह आर्ट से जुड़े हैं। साविक पर्यावरण फ्रेंडली वस्तुएं बनाते है औऱ ऐसे कारीगरों को जोड़ने की कोशिश करतेहै। वह कहते हैं, "हम कारीगरों को सशक्त बनाना चाहते हैं।

42 वर्षीय सुनीता जाखड़ के लिए उनके उत्पादों की प्रेरणा उनकी पुरानी यादों से आती है। जाखड़ ने बताया कि वह एक कपड़ा डिजाइनर है। वह राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र सीकर में पली-बढ़ीं, जहां से उन्हें अपना खुद का ब्रांड 'फटफटिया' शुरू का आइडिया मिला।

सुनीता जाखड़ ने राजस्थानी भाषा का जिक्र करते हुए कहा कि सीकर में ऑटो को फटफटिया कहते है। वे चमकीले और फंकी हैं, जिसके कारण मुझे भी उसी तरह के डिजाइन बनाने का आइडिया मिला।

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