Shivam Singh: गुमटी में दुकान चलाने वाले का बेटा बना डिप्‍टी कलेक्‍टर, पहले प्रयास में पास की PCS परीक्षा

uppsc pcs 2019 stationery seller son shivam singh became deputy collector: रायबरेली। 'मंजिल उन्हें ही मिलती है जिनके सपनो में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।' ये कहावत रायबरेली के रहने वाले शि‍वम सिंह पर फिट बैठती है। शि‍वम ने यूपीपीसीएस 2019 में कामयाबी हासिल कर परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। उनका चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ है। शिवम के पिता रामनरेश सिंह उर्फ पप्पू की स्टेशनरी की छोटी सी दुकान है। बेटे की उपलब्‍धि के बाद घर में जश्‍न का माहौल है।

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    गुमटी में दुकान चलाने वाले का बेटा बना डिप्‍टी कलेक्‍टर, पहले प्रयास में पास की PCS परीक्षा
    एमटेक के बाद की तैयारी, पहले प्रयास में हासिल की सफलता

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    रायबरेली शहर के मिलएरिया थाना क्षेत्र के प्रगतिपुरम में रहने वाले शिवम सिंह ने बताया कि उन्‍हें डिप्टी कलेक्टर का पद मिला है। ये उनका पहला प्रयास था। शिवम ने इसका श्रेय अपने माता-पिता, रिश्तेदार और दोस्तों को दिया है। शिवम ने बताया कि सिविल सेवा की तैयारी उन्‍होंने आईआईटी धनबाद से एमटेक के बाद शुरू की। पढ़ाई के लिए वह सात महीने दिल्ली में रहे, फिर कोरोना की वजह से घर आ गए।

    शिवम ने किया घर-परिवार का नाम रोशन

    शिवम ने किया घर-परिवार का नाम रोशन

    शिवम ने गरीबी के बावजूद ना सिर्फ घर-परिवार बल्कि पूरे इलाके का नाम जो रोशन किया है। यूपीपीसीएस में 38वीं रैंक लाकर उसने हर एक का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। अब आलम ये है कि शिवम के घर से लेकर उसके पिता की दुकान तक जहां मिठाईयां बट रही हैं, वहीं बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। शिवम के पिता रामनरेश सिंह उर्फ पप्पू ने बताया कि विकास भवन के पास उनकी स्टेशनरी की छोटी सी दुकान है। उनके दो बेटे हैं, शिवम और शुभम। ये दोनों लोग पढ़े हैं, और पहले प्रयास में डिप्टी कलेक्टर का पद मिल गया है। बस सबसे बड़ी खुशी यही है ये सब लोग अच्छे से रहे और पढ़ाई-लिखाई करें।

    पिता बोले- आर्थिक स्‍थित‍ि कमजोर थी, लेकिन...

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    शिवम के पिता ने कहा, 'शुरू से हमारी सोच रही कि बच्चे अच्छे से रहें, पढ़ाई-लिखाई करें और इन लोगों ने मेरा साथ दिया। हमने इनका पूरा सहयोग किया। अब रिजल्ट मिल गया। हां, आर्थिक स्थिति कमजोर थी, दो महीने बाद चार महीने बाद इन्हें पैसे की जरूरत पड़ेगी, तो हम पहले से सोचकर रखते थे और समय पर पहुंच जाते थे। हमारी दुकान ऑफिस के पास है, तो सब लोगों का स्पोर्ट मिलता था।'

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